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3 दिन तक सब अच्छा चलता है… चौथे दिन Goal क्यों बदल जाता है?

Published On: June 26, 2026
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har 3 din baad goal kyon badal jaata hai

क्या आपने कभी ये सोचा है की आपको अपने लाइफ को बदलना है कुछ पाना चाहते है लेकिन जब भी अपने लिए कोई गोल बनातें है तो 3 दिन सब कुछ बहुत अच्छा चलता है लेकिन उसके अगले ही दिन सब कुछ बदल जाता है आप अपने पुराने जीवन में वापस चले आते है, आख़िर ऐसा क्यों,

श्याद यही वजह है कि सभी अपने जीवन में सब कुछ पाना चाहते है लेकिन बस 1% लोग ही वो पातें है जो वो सोचते है की उन्हें चाहिए, आख़िर इतना बड़ा गैप क्यों है, वो इसलिए क्योंकि हम जब भी कुछ डिसाइड करते है की मुझे ऐसा कुछ करना है हम ज़्यादा देर, ज़्यादा दिन तक उस पर स्टिक रह नहीं पातें,

हम हर कुछ दिनों में अपनी सोच और गोल बदल लेते है, हमें हर गोल पहले वाले गोल से बहुत अच्छा लगता है, लगता है की इस बार वाला बहुत ज़्यादा परफ़ेक्ट है, लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है की आख़िर ऐसा क्यों होता है, पता है दिक्कत गोल में नहीं है आप मेहनत नहीं कर पाते किसी भी काम पर बहुत देर तक कंसिस्टेंट नहीं रह पातें, इसलिए हर चौथे दिन सब कुछ बदल जाता है!

मैंने एक Pattern देखा… ज्यादातर लोग चौथे दिन ही रुक जाते हैं

जब से मुझे ये रियलाइज़ हुआ की बस किश्मत से ही सब कुछ नहीं मिलता, बस 0.1% लोग ऐसे होते है जो किश्मत के धनी होते है लेकिन बाक़ी 99.99% लोगो को मेहनत करनी होती है और इस दौरान बहुत सारे लोगो सफल हो जाते है क्योंकि वो मेहनत से उसे पा लेते है, जो उन्हें वाक़ई चाहिए होता है,

लेकिन मैं कई बार फेल होता आ आया हूँ, आज भी पहली बार में मुझे कुछ भी नहीं मिलता, यहाँ तक कि मैं जिस काम में बहुत ज़्यादा एक्सपर्ट हूँ उस काम में भी मुझे कई बार फेल होना पड़ता है, आपको जजुब्ब होगी पहले के मुक़ाबले ये बढ़ा है, जब मैं शुरू में ये बात 2019 – 20 की है उस समय मैं बहुत कम एफर्ट लगा कर भी कंटेंट क्रिएशन करता था तो लोगो को पसंद आता था,

अब 2026 में मैं बहुत ज़्यादा भी एफर्ट लगता हूँ तो कई बार वो कंटेंट मेरे रीडर या Viewer को पसंद नहीं आता, आख़िर ऐसा क्यों?

क्योंकि अब उनका मेंटल प्रोग्रामिंग पहले से इम्प्रूव हो चुकी है, अब वो बहुत अच्छी चीज़ें पसंद करते है, तो अब और मेहनत करनी पड़ती है ताकि और अच्छा कंटेंट बन सके, और इसमें लगातार मेहनत करनी पड़ती है बिना रुके,

अब मैं हर 3 दिन के बाद चौथे दिन फेल नहीं हो जाता हूँ, मैं उसे बदल नहीं देता हूँ मैं उसपर कई सालों से लगातार मेहनत कर पा रहा हूँ, मैं बहुत सारे लोगो की तुलना में हर रोज अपना प्रोफेशन अपना गोल नहीं बदलता,

हाँ ऐसा भी नहीं है कि मैं 1% में आ गया हूँ, लेकिन मैं बहुत क़रीब हूँ, और ये सब बस हैबिट की वजह से मुमकिन हो पाया है, मैं लगातार एक ही काम कर रहा हूँ, बिना टॉर्चर महसूस किए, बिना ऊबे हुए, इस वजह से मैं बहुत कुछ अचीव किया, ये सब मेरे लिए खुली आँखों से सपने जैसा था पहले, लेकिन अब हकीकत !

मैंने ये बहुत करीबी से देखा की बहुत सारे लोगो अपने लिए एक गोल ज़रूर बनातें है लेकिन उन्हें ये पता ही नहीं होता है कि वहाँ तक पहुचने के लिए उन्हें क्या स्टेप लेने चाहिए, वो 3 दिन बहुत सारे स्टेप लेते है, इस दौरान कुछ भी करते है, और चौथे दिन उन्हें जब कोई रिजल्ट नहीं दिखाई देता है वो उसे छोड़ देते है,

एक उदाहरण से समझिए, आपको कुछ ऐसा काम कर रहे है जिसमे निशाने की जरूरत है, जैसे कुछ भी कोई फल तोड़ना, कुछ ऐसा काम जिसके दौरान आपको एक ही जगह पर बार बार वार करना पड़ता है, लेकिन आप ऐसा कर ही नहीं पातें, अगर आप कोई पेड़ काट रहे है तो आपको अंत तक एक ही जगह या उसके बहुत क़रीब वार करना होगा,

तभी गुंजाइश है की आप उसे काट सकेंगे, लेकिन अगर आप ऐसा नहीं कर पा रहे है तो आपको बजाये उसे छोड़ देने के, आपको लगातार उस पेड़ को काटते समय अपने वॉर को और इम्प्रूव करना होगा, आपका फोकस, आपके हर वार में मजबूती, एक स्ट्रेटेजी बहुत कुछ लगाना होता है तब जा कर आप एक ही जगह पर वार कर पातें है और अंत में उस पेड़ को काट पातें है,

मैं आज अपने बहुत सारे काम को कर पाता हूँ और इसका क्रेडिट मैं अपने हैबिट को देता हूँ –

मान लीजिए मुझे अगर कोई बुक लिखनी है और वो 15000 शब्द की होने वाली है तो मुझे क्या करना होगा?

मुझे हर रोज़ 500 शब्द लिखना होगा

मैं जो बुक लिख रहा हूँ वो 15000 शब्द का है और उसे अगर मुझे 30 दिनों में पूरा करना है, तो मुझे उसके लिए हर रोज़ कम से कम 500 शब्द लिखने होंगे, तब जा कर मैं उसे 30 दिनों में पूरा कर पाहूँगा, और इसके पहले मुझे कम से कम 1 घंटे देना होगा ताकि मैं ये समझ पाऊँ की इसमें वैल्यू है या नहीं,

क्योंकि अगर कोई रीडर इसे पढ़ेगा तो उसका समय भी बर्बाद ना लगे, वो अगर उसे पढ़ रहा है तो अंत में कुछ ले कर जा पाये जिससे उसके जीवन में बदलाव हो, कुल मिलाकर क़रीब मुझे 2 घंटे रोज़ाना देने होंगे, 500 शब्द लिखने में 1 घंटे और 1 घंटे उसे प्रिपेयर करने में,

2 घंटे रोज़ाना क़रीब 60 घंटे फिट उसे करेक्शन में कुछ घंटे यानी करीब करीब किसी एक बुक को लिखने में मुझे कम से कम 100 घंटे देने होंगे तब जा कर एक बुक लिख पाऊँगा,

ट्रैक करना होगा प्रोग्रेस को

अगर एक बुक को लिखना है जिसमे कम से कम 100 घंटे लगने वाले है और इसे 30 दिनों में पूरा करना है तो मुझे ये भी ट्रैक करना होगा की मैं हर रोज़ यहाँ कितना घंटा काम कर रहा हूँ, जैसे की हर रोज 3 घंटे और 20 मिनट के हिसाब से, जिसमे कम से कम रोज़ 500 शब्द राइटिंग और करेक्शन और प्रीप्रेशन शामिल होगा,

हर रोज ये सिलसिला 30 दिनों तक अपनाना होगा, अगर एक दिन चुके तो या तो मुझे ज़्यादा काम करना होगा अगले दिन या फिर मुझे इसे पूरा करने वाले समय को बढ़ाना होगा, जो ज्यादातर मैं नहीं बढ़ाना चाहता, इसलिए मुझे अगले दिन ज़्यादा काम करना होगा, शुरू में कुछ भी अचीवमेंट नहीं दिखाई देगी, कोई मोटिवेशन नहीं आयेगा,

लेकिन मैं इसे हर रोज़ सेलिब्रेट करता हूँ क्योंकि मैं हर रोज़ के टास्क को पूरा होते ही इसे अपनी जीत समझता हूँ, क्योंकि मुझे अपने दिमाग़ को भी अपनी अचीवमेंट रोज़ दिखानी पड़ती है,

आपके शरीर को चलने के लिए हेल्थी खाना चाहिए जब की आपके दिमाग़ को हेल्थी खाने के साथ हेल्थी प्रोग्रेस भी दिखनी चाहिए, उसे ये दिखाना चाहिए की मैं जो हर रोज़ बर्नआउट हो रहा है उसका रिजल्ट कहीं ना कहीं आ रहा है,

कंसिस्टेंट रहने के लिए हेल्थी लाइफस्टाइल अपनाना हूँ

अब ऐसा नहीं है कि मैं कोई रोबोट हूँ मैं जो चाहे कर सकता हूँ जो भी मुझे कमांड मिले, नहीं मैं इंशांत हूँ, मैं अगर कुछ कर पा रहा हूँ तो इसकी वजह एक अच्छा माहोल मेरे शरीर के लिए और मेरे दिमाग़ के लिए, शरीर के लिए अच्छा माहोल है अच्छा और हेल्थी खाना है और एक्सरसाइस और अच्छी नींद,

इससे दिमाग़ को भी मदद मिलती है कि वो अच्छा सोच सके, बारीकी चीज़ों पर ध्यान दे सके, अगर मैं बहुत सारे फ़ालतू रील देख लूँ तो मेरे दिमाग़ को बहुत सारा डोपामिन (ख़ुशी) मिल जाएगा लेकिन इससे दिमाग़ में पॉल्यूशन भी बढ़ेगा, दिमाग़ बहुत सारी चीज़ों को प्रोसेस करेगा जो उसके किसी काम की नहीं है,

Conclusion

अब यहाँ मेरी बात थी की एक 15000 वर्ड के बुक को लिखने के लिए मेरी क्या हैबिट होती है मैं क्या क्या ध्यान रखता हूँ क्या करता हूँ, लेकिन ये बात यही ख़त्म नहीं होती, आप अपने जीवन में कुछ भी करना चाहते है आपको उसके हिसाब से अपनी हैबिट बनानी पड़ती है ताकि आप ज़्यादा दिन तक उसपर क़ायम रह सके,

सोचिए आपको सुबह में एक निश्चित समय पर रोज़ कहीं जाना है तो आप कोशिश करेंगे की सुबह में जल्दी उठा जाये, तो अब सुबह उठने के लिए आपको समय पर रात में सोना होगा और उसके साथ आपको अपने सभी को रात में सोने से पहले ही करना होगा ताकि सुबह उतने के बाद बहुत सारे डिस्ट्रकशन ना हो, क्योंकि आपको सुबह में कहीं पहुँचना है,

ऐसा नहीं कि बस सुबह पहुँचना है तो रात को देर से भी सोऊँगा तो चलेगा, बहुत सारे काम सुबह के लिए छोड़ देने से भी चलेगा, जी नहीं, नहीं चलेगा, क्योंकि तब आप समय पर सुबह में हर रोज समय पर नहीं पहुँच पाओगे, इस आदत में आप बहुत दिन तक कंसिस्टेंट नहीं रह पाओगे !

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Ye post kaam ka laga? Inme se aapki problem kaunsi hai?

Har ebook ek problem ka seedha hal hai. Jo baat aap par fit baithe, use kholiye.

Naveen Pandey

लेखक परिचय: नवीन पांडे 18 वर्षों के लेखन अनुभव और 5000 से अधिक लेखों के साथ, नवीन पांडे एक अनुभवी कंटेंट क्रिएटर और 'माइंड दर्पण' के संस्थापक हैं। संघर्ष से सफलता तक के अपने सफर में उन्होंने डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी चुनौतियों को करीब से महसूस किया है। आज वे अपनी आगामी ई-बुक "Sharp Mind" और ब्लॉग के माध्यम से लोगों को सूक्ष्म आदतों (Micro-Habits) की शक्ति से परिचित करा रहे हैं। उनका मिशन मिडिल क्लास परिवारों के युवाओं को मानसिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें सफलता का एक सरल, व्यावहारिक रोडमैप प्रदान करना है। नवीन का मानना है कि छोटी-छोटी आदतें ही जीवन में बड़ा बदलाव लाती हैं।

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