Link copy ho gaya

हर नई आदत 5 दिन बाद छूट जाती है? यही वजह है कि 99% लोग Consistent नहीं रह पाते !!

Published On: June 26, 2026
Follow Us
इसलिए नई आदत 5 दिन में छूट जाती है

सच बताना क्या आप किसी भी नई हैबिट को आसानी से अपना लेते है नहीं ना, कुछ साल पहले तक मैंने भी कई सारी आदतों को बहुत लंबे समय तक कंसिस्टेंट नहीं रह पाता था, जब मैं किसी भी नई हैबिट पर जब काम करता था तो शुरू में तो बहुत जोश के साथ उस हैबिट को आदत में लाता था,

लेकिन जैसे ही कुछ दिन बीतते थे, धीरे धीरे पता नहीं कब मैं अपने पुराने रूटीन में आ जाता था मुझे पता ही नहीं चलता था, फिर धीरे धीरे वो नई आदत छोट जाती थी, मैंने कई बार तो अपने किसी नए हैबिट के लिए डिजिटल कैलेंडर पर मार्क भी किया है टाइम के साथ ताकि उस समय मुझे रिमाइंडर मिल जाये और मैं उसे हैबिट में ला सकूँ,

ऐसा नहीं है कि ये मेरे साथ कुछ दिनों में ही हो जाता था मैं कई बार कई आदतों को कुछ महीनों तक उस पर मेहनत करने के बाद छोड़ दिया है, मैं आपको बता दूँ की ऐसा नहीं है कि मैंने इसे जान बूझ कर किया था, वो अपने आप पता नहीं कब छूट जाती थी, लेकिन कुछ सालों में मैंने कुछ एक्सपेरिमेंट किए जिसका परिणाम मुझे बहुत अच्छा मिला, आज आपको वो तरीक़े बताने वाला हूँ जो काम करते है

मैं नई हैबिट को अपनाने के लिए उसे पुरानी हैबिट से जोड़ता हूँ

जब आप किसी नई हैबिट को अपनाते है तो वो आपके दिमाग़ और आपके शरीर के लिए एकदम नया होता है, और किसी भी नई हैबिट को करने के लिए आपको पहले उसके लिए माहोल बनाना होता है, अपने दिमाग़ और शरीर को ट्रेंड करना होता है, बार बार कई बार, लेकिन आप ये हमेशा नहीं कर पातें है,

क्योंकि आपकी दिमागी हालात हमेशा बदलते है, आपके इमोशन हमेशा बदलते है, कभी आप बहुत एनर्जेटिक महसूस करते है कभी आप बहुत लो महसूस करते है, क्योंकि आप इंशान है और आपका दिमाग़ हमेशा नई चीज़ों पर ज़्यादा ध्यान देता है, पुरानी को वो ऑटोपायलट मोड पर करता है,

सोचिए आप क्या सुबह ब्रश करने के लिए बहुत ज़्यादा ध्यान लगाते है, आप बहुत से ऐसे अपने जरूरी काम बहुत ही आसानी से कर लेते है क्योंकि आपका दिमाग़ उसे अब ऑटोपायलट पर करता है आपको उसके लिए बहुत ज़्यादा ध्यान की ज़रूरत नहीं होती,

लेकिन वही काम एकदम छोटे से छोटा जब आप पहली बार करते है तो आपको उसके लिए बहुत सजगता की जरूरत होती है,

अब यहाँ एक बहुत गहरी बात बात है, अगर आप अपनी हर पुरानी हैबिट को नई हैबिट से जोड़ लेते है तो आपको हर बार माहोल बनाने की जरूरत नहीं होती, आप अपना बहुत सारा काम बहुत ही आसानी से कर लेते है,

अब मेरी बात करता हूँ, मुझे Books पढ़ना बहुत पसंद है, लेकिन ऐसा नहीं है कि मैं बुक बहुत ज़्यादा पढ़ता था कुछ साल पहले तक, वो इसलिए क्योंकि ये मेरी हैबिट में नहीं था, मैं बुक पढ़ना चाहता था लेकिन कुछ मिनटों के बाद मुझे नींद आने लगती थी, आपके साथ भी ऐसा कई बार हुआ होगा,

लेकिन फिर मैंने 2019 के दौरान, कुछ यूट्यूब वीडियोज को देखा की बुक पढ़ने का सही समय क्या है, क्योंकि मैं ढूँढ ही रहा था आख़िर मैं इसे कैसे और इम्प्रूव करूँ, मैंने तब मैं रात को सोने से पहले कुछ देर पढ़ूँगा,

यहाँ पुरानी आदत थी – रात को सोना !! खास तौर पर हम सभी ही रात को सोते है

नई आदत – सोने से पहले बुक पढ़ना

अब जैसे ही मैंने ऐसा किया, मैंने देखा कि मुझे बुक पढ़ने के लिए माहोल बनाना नहीं पड़ता, मुझे बहुत ज़्यादा एफर्ट नहीं लगाना पड़ता की मुझे पढ़ना है, सोने के लिए जब जाता हूँ तो कुछ घंटे अब आसानी से पढ़ लेता हूँ,

इससे अब मैं कभी भी जब चाहूँ घंटों पढ़ सकता हूँ, पढ़ने की हैबिट बहुत आसानी से मैंने अपने अंदर बिल्ड कर ली,

इसी तरह से बहुत सारे हैबिट पर मैंने अपने लिए काम करना शुरू कर दिया जिसपर मैं लगता 2019 से सफल रहा हूँ जैसे की –

  • दुबारा सुबह में फ्रेश होने के बाद कुछ देर बुक पढ़ना !
  • बुक रीडिंग के बाद एक्सरसाइज करना !
  • वीडियो क्रिएशन से पहले आर्टिकल लिखना !
  • ऑनलाइन पसंदीदा चीज़ों को ख़रीदने से पहले उसे एक दिन उसे पहले कार्ट में रखना, उसके बाद अगर जरूरत लगे तो खरीदना !
  • जब तक अपने सभी जरूरी काम को पूरा नहीं करता हूँ मैंने स्मार्टफोन को एंटरटेनमेंट के लिए इस्तेमाल नहीं करता !
  • एंटरटेनमेंट के दौरान मैं अपने कमरे की AC को ऑन नहीं करता हूँ, क्योंकि मैं नहीं चाहता कि दिमाग़ हमेशा मनोरंजन के पीछे समय बर्बाद करे !
  • काम करने के बाद ही आराम या अपना पसंदीदा शो देखना !

ऐसे कई नई हैबिट है जिसे मैं अपने जीवन में उतार पाया और बहुत ही आसानी से, इसके लिए मुझे अलग से एफर्ट नहीं डालना पड़ता क्योंकि मैंने इसे अपनी पुरानी हैबिट के साथ जोड़ रखा है,

हाँ अगर मैं पहले से नई के लिए काम करता तो हो सकता था की एक समय आता कि मुझे बहुत सारी चीज़ों को याद रखना पड़ता, जो शायद पॉसिबल नहीं है किसी भी इंसानी दिमाग़ के लिए, और जितनी जबरदस्ती ख़ुद से ठीक नहीं है, हमारी शारीरिक और दिमागी सेहत के लिए !

नई हैबिट को स्मार्टली अपनाओ

हाँ ये सही है की आपकी आदतें ही आपको फर्स से अर्श पर ले जाती है लेकिन ये आपको पता है जब आप सोचते हो, लेकिन उसी मोड में हमेशा रहना किसी के लिए भी पॉसिबल नहीं है, अगर आप ऐसा करते है तो आपको टॉर्चर महसूस होने लगेगा, आपको अपने ही जीवन से ऊबने लगेगे, इससे भागने का बहाना ढूँढने लगेंगे,

इसलिए किसी भी नए हैबिट को अपनाने के लिए आपको पहले अपने किसी पुरानी हैबिट को अपनी नई हैबिट के साथ जोड़ना होगा, इसमें आपको तब बहुत ज़्यादा एनर्जी की ज़रूरत नहीं होगी, आपका दिमाग़ इसे ऑटोपायलट पर करना शुरू कर देगा,

इससे कुछ समय बाद ऐसा होगा कि जब आप उसे नहीं करते हो तो आपको कुछ खाली सा लगेगा, क्योंकि कुछ मिसिंग सा लगेगा और आप उसे आसानी से बिना सोचे करना शुरू कर दोगे,

अब आपको ढूँढना है की आपके जीवन में आपके लिए क्या जरूरी है और कब आपको इसे किस हैबिट से जोड़ना होगा,

ध्यान रखें, ऐसा नहीं है किसी भी पुरानी हैबिट से कुछ भी जोड़ देने पर ये काम करेगा, क्योंकि मान लो आप एक्सरसाइज करने के बाद कुछ पढ़ना चाहो तो नहीं पढ़ पाओगे क्योंकि आपकी बॉडी उस समय स्ट्रगल कर रही होगी जो आपके फोकस को भटकाएगी,

इसलिए आपको देखना होगा कि आपको किस पुरानी हैबिट के साथ कौन सी नहीं हैबिट को जोड़ना चाहिए !!

Conclusion

अगर आप बहुत ध्यान से देखोगे तो पाओगे की हमारी छोटी छोटी हैबिट की ही वजह से हमारा कैरेक्टर और हमारा जीवन बनता है, अगर आपने एक्सरसाइज करने की आदत डाली है तो आपका शरीर हमेशा फिट रहेगा, आप कम स्टर्गल करेंगे शारीरक तरीके से, अगर आपने बुक पढ़ने की आदत डाली है तो आप अनजाने में अपने फोकस को और इम्प्रूव कर रहे है

साथ में नई जानकारी भी ख़ुद को दे रहो जो आपको आउटडेटेड होने से बचाएगी, और आपको हमेशा प्रसेंट के लिए रिलेवेंट रखेगी,

मैं तो हर किसी को यही सलाह दूँगा की अगर आपको अपनी जीवन में अच्छा बहुत बड़ा कुछ हासिल करना है तो उसे बहुत छोटे छोटे हिस्सों में बाटों और उसे हैबिट के रूप में अपना लो, देखो फिर जो आपको चाहिए वो आसानी से मिल जाएगा,

उम्मीद है इस जानकारी से आपको सही दिशा जरूर मिलेगी, कोई प्रश्न है तो जरूर पूछें मुझे ख़ुशी होगी उस पर अपनी राय देने में !!

आपके लिए खाश इसे भी जरूर पढ़े !!
मैं हमेशा Busy था, लेकिन Productive नहीं — फिर मुझे वजह समझ आई
मुझे देर से समझ आया कि मेरी जिंदगी इन 3 Pillars पर टिकी है !!
आपका Focus खत्म नहीं हो रहा, आप उसे गलत जगह बर्बाद कर रहे हैं !!

Ye post kaam ka laga? Inme se aapki problem kaunsi hai?

Har ebook ek problem ka seedha hal hai. Jo baat aap par fit baithe, use kholiye.

Naveen Pandey

लेखक परिचय: नवीन पांडे 18 वर्षों के लेखन अनुभव और 5000 से अधिक लेखों के साथ, नवीन पांडे एक अनुभवी कंटेंट क्रिएटर और 'माइंड दर्पण' के संस्थापक हैं। संघर्ष से सफलता तक के अपने सफर में उन्होंने डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी चुनौतियों को करीब से महसूस किया है। आज वे अपनी आगामी ई-बुक "Sharp Mind" और ब्लॉग के माध्यम से लोगों को सूक्ष्म आदतों (Micro-Habits) की शक्ति से परिचित करा रहे हैं। उनका मिशन मिडिल क्लास परिवारों के युवाओं को मानसिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें सफलता का एक सरल, व्यावहारिक रोडमैप प्रदान करना है। नवीन का मानना है कि छोटी-छोटी आदतें ही जीवन में बड़ा बदलाव लाती हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment