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अगला Decision लेने से पहले… ये ज़रूर कर लें।

Published On: July 15, 2026
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रुक कर चुनो

क्या आपने नोटिस किया है कि आप अपने जीवन में जो भी फ़ैसले लेते हो क्या वो पूरी सूझ – बुझ से आप लेते हो या बस फैसला लेना जरूरी है इसलिए ले लेते हो, क्या वजह ये होती है की कहीं कुछ छूट ना जाये इसलिए फ़ैसला ले लेते हो, या क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि जब भी आप कुछ फील करते हो उसे सम्भाल नहीं पाते और तुरंत बता देते हो, गुस्सा करके, इमोशन जता के,

क्योंकि 90% आज ऐसे ही Decision ले रहे है, वो कुछ भी करने से पहले अपने आसपास के माहौल से इंफ़्युलेंस हो कर बिना सोचे समझे फैसला ले लेते है, आज कल तो ये और भी आम बात हो गई है, क्योंकि अगर कोई कोई फैसला लेने से पहले कुछ सोचता भी है तो लोग उसे मंद बुद्धि करके ख़ुद से अलग कर देते है,

अगर आप ऐसा करते है कुछ भी करने से पहले नहीं सोचते तो पता है आप क्या खोते है –

  • आपके Decision लेने के बाद जो रिजल्ट आने वाला है वो आपके लिए परफेक्ट होगा या नहीं इसकी संभावना जीरो हो जाती है,
  • आप अपने निर्णय को बदल नहीं सकते
  • आपको अपने ग़लत फ़ैसले के साथ स्ट्रगल करना पड़ता है
  • कई लोग तो ग़लत निर्णय लेने के बाद उसे सही करने में अपना समय और पैसा दोनों गवा देते है
  • आप अपने कल को अफ़ेक्ट कर देते है
  • आप सही दिशा में सोच नहीं पाते
  • आपके रिश्ते ख़राब होते है

ऐसी ना जाने कितनी ही चीज़ें आप झेलते है बस अपने एक ग़लत हैबिट की वजह है जो की है Decision लेने से पहले अपने आसपास के माहौल और लोगो से इंफ़्युलेंस होके, यही वजह है कि 90% लोग हमेशा स्ट्रगल करते है,

बस एक Pause आपको कई Struggle से बचा लेती है

क्या आप जानते है की कुछ भी करने से पहले चाहे हो कितना ही छोटा या बड़ा decision हो अगर आप उसे करने से पहले थोड़ा pause लेते है यानी तुरंत Reaction नहीं देते है तो आप कई बार ऐसा होता है जब आप ग़लत फैसले लेने से बच जाते हो,

क्योंकि आज जब कोई फ़ैसला लेते है तो 99% बार होता है कि आप अपने उस समय के मूड, फीलिंग, माहौल, आसपास के लोग को देखते हुए Decision लेते हो और यही वजह है कि आपको जो चीज़ अच्छी नहीं भी लगती है उसे भी आपको उस समय करना पड़ जाता है, हम अपने,

ये गीता का सार भी है – गीता के छठे अध्याय में श्री कृष्ण संतुलन (Balance) बनाए रखने की बात करते हैं। जब इंसान बहुत अधिक गुस्से में, बहुत दुखी या फिर बहुत ज्यादा खुश (Extreme Emotions) होता है, तो उसकी बुद्धि काम करना बंद कर देती है।

क्रोध से बुद्धि का नाश: अध्याय 2, श्लोक 63 में कृष्ण कहते हैं— “क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः…” यानी क्रोध से सम्मोह (भ्रम) पैदा होता है, भ्रम से स्मृति नष्ट होती है और स्मृति नष्ट होने से बुद्धि का नाश हो जाता है। जब बुद्धि ही नष्ट हो जाएगी, तो लिया गया हर फैसला गलत होगा। इसलिए गुस्से या आवेश में तुरंत जवाब देने या फैसला लेने के बजाय रुकना सबसे जरूरी है।

यानी जब भी आप कुछ करते हो जहाँ आपके रियेक्ट करने की बारी आए तो अपने फीलिंग को तुरंत उजागर मत करो, अगर आपको सामने वाले की कोई बात अच्छी नहीं लगती, तो आपको थोड़ा रुकना चाहिए, और उसके बाद आपको अगर लगता है की इसका उत्तर देना जरूरी है तो आप आगे बढ़ सकते है,

कई बार ऐसा होता है कि हम पूरी बात समझ भी नहीं पातें और हमें लगता है कि ये वाक़ई ग़लत है और हम React कर देते है,

आज कल तो ये बहुत आम हो गया है की लोग गोल तो बना लेते है लेकिन उसपर कुछ दिन मेहनत करके उन्हें लगता है कि ये गोल बहुत अच्छा नहीं है क्योंकि पहले दिन से वाहन कोई result नहीं दिखाई दे रहा है, और इस वजह से वो हमेशा अपने गोल बदलते रहते है,

Pause लेते ही आप बहुत कुछ बदल देते हो

जैसे ही आप कुछ महसूस करते हो, या कोई Decision लेने की बारी आती है और आप pause ले लेते हो, तो आप बहुत सारे स्ट्रगल को पहले ही रोक देते हो,

  • जब आप pause लेते हो तो Result आपके हिसाब से आते है
  • आप एक सिचुएशन को कई अलग अलग तरह से देख पाते हो
  • आप समझ पाते हो की मुझे यहाँ अपनी कितनी एनर्जी और समय देना है
  • आप अपने कल को अपने हिसाब से बना लेते हो,
  • आपको बार बार अपने निर्णय को बदलना नहीं पड़ता
  • आपको निर्णय की वजह से पछतावा और स्ट्रगल नहीं झेलनी पड़ती
  • आप बहुत दूर तक सोच पाते हो
  • होने वाली दुर्घटना को टाल देते है
  • आपके निर्णय को आपका माहौल, लोग, आपकी फीलिंग नहीं बदलती

बात बहुत छोटी सी है लेकिन pause लेते ही आप बहुत दूर निकल जाते हो, बहुत सारे distraction को आप खतम कर देते हो,

एक हैबिट और बहुत सारे स्ट्रगल ख़त्म

आज सिचुएशन ऐसी है की लोग अपने फीलिंग के हिसाब से जीवन जीते है, वो ख़ुद को अपनी सिचुएशन से कभी अलग कर ही नहीं पातें, जिस वजह से उनका आज, कल दोनों चला जाता है, और उसका इफ़ेक्ट उनके शरीर पर भी दिखाई देता है,

उदाहरण से समझिए – एक ऐसा इंसान जो अपने मूड के हिसाब से जीवन जीता है, वो घर से निकलता है तो आपको क्या लगता है कि वो घर सही सलामत तरीक़े से पहुँच जायेगा, जी नहीं, क्योंकि रास्ते में गया कुछ और करने और कुछ और करके वापस आ जाये, ये भी हो सकता है कि घर वापस ही ना आए,

2020 के बाद से अनजाने में मेरे अंदर एक हैबिट बननी शुरू हो गई, की कुछ भी मैं पहले अटेम्प में नहीं करता, यानी दिमाग़ में अगर कोई बात आ रही है तो उसे तुरंत ही करने नहीं लगता, क्योंकि आज क्या करना है ये ज्यादातर मेरा प्री प्लान रहता है, तो अब अगर कोई बात, कोई फीलिंग, या गुसा आते ही, मैं उसे लिख लेता है,

इसे जर्नल में लिखने के बाद ही ये बात मेरे दिमाग़ से निकल जाती है,

फिर कुछ घंटों के बाद फिर से अगर वो बात मेरे दिमाग़ में घूम रही है, तो भी मैं उसे लिखता हूँ, जब ये सिलसिला 3 या 4 दिन चलता है तो उसके बारे में मैं फिर से लिखता हूँ, आख़िर ऐसा क्यों इसके आधार पर, देखते ही देखते हर लेयर के लिखते ही मेरी सारी कन्फ्यूज़न दूर होने लगती है,

ऐसा करते ही उस टॉपिक को लेकर मेरे विचार विलकुल ही बदल जाते है 90% टाइम ऐसा होता है, मैंने कोई भी ख़रीदारी पहली बार नहीं की तब से, मैं ऐड तो कार्ट करके कई दिनों तक उसे छोड़ देता हूँ, फिर जब वाक़ई ज़रूरत होती है तब ख़रीदता हूँ,

इससे मैं बहुत कुछ टाल देता हूँ, मुझे इंस्टेंट मिलने वाला थ्रिल बिल्कुल ही पसंद नहीं आता,

उस डिसिशन को लेने से पहले क्या बदला और उस डिसिशन को लेने के बाद क्या बदलेगा, इस पर मेरा ज़्यादा ध्यान जाता है, और इस वजह से आज मैं कई सालों से मेंटली स्टेबल हूँ,

Conclusion

आप चाहे किसी भी उम्र में हो तो एक हैबिट आज ही अपने अंदर बनानी शुरू कर दीजिए की कोई भी Decision लेने से पहले या कोई भी feeling पर react करने से पहले आपको थोड़ा Pause लेना है, क्योंकि ऐसी स्थिति में इंसान अपने दिमाग से फैसले नहीं लेता, वो अपने उस समय के इमोशन की वजह से फ़ैसले लेता है,

सोचिए आप कुछ ऐसा तुरंत करने वाले है जो आपके कई साल अफेक्ट कर देगा, तो आप जब सोचने के हालात में होंगे तब कभी भी रियेक्ट नहीं करेंगे, वही अगर आप सोचने के हालात में नहीं है तो आप तुरंत रियेक्ट कर देंगे और हो सकता है फिर कई सालो तक आपको इस बात के लिए पछतावा हो,

हमेशा रुकिए थोड़ा सिचुएशन को समझिए, अपने फीलिंग को समझिए, इससे आप सही दिशा में बढ़ना शुरू कर देने और बहुत सारे स्ट्रगल को ख़त्म कर देंगे, उम्मीद है इस आर्टिकल से आपके जीवन की दिशा बदलेगी, कोई प्रश्न या सुझाव हो तो कमेंट में जरूर लिखिए, आपके कीमती समय के लिए बेहद धन्यावाद, आपका दिन शुभ हो !

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Ye post kaam ka laga? Inme se aapki problem kaunsi hai?

Har ebook ek problem ka seedha hal hai. Jo baat aap par fit baithe, use kholiye.

Naveen Pandey

लेखक परिचय: नवीन पांडे 18 वर्षों के लेखन अनुभव और 5000 से अधिक लेखों के साथ, नवीन पांडे एक अनुभवी कंटेंट क्रिएटर और 'माइंड दर्पण' के संस्थापक हैं। संघर्ष से सफलता तक के अपने सफर में उन्होंने डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी चुनौतियों को करीब से महसूस किया है। आज वे अपनी आगामी ई-बुक "Sharp Mind" और ब्लॉग के माध्यम से लोगों को सूक्ष्म आदतों (Micro-Habits) की शक्ति से परिचित करा रहे हैं। उनका मिशन मिडिल क्लास परिवारों के युवाओं को मानसिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें सफलता का एक सरल, व्यावहारिक रोडमैप प्रदान करना है। नवीन का मानना है कि छोटी-छोटी आदतें ही जीवन में बड़ा बदलाव लाती हैं।

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