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क्या आपके जीवन की दिशा आपके हाथ में मौजूद Screen तय कर रहा है?

Published On: June 8, 2026
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आपके जीवन की दिशा आपका हाथ में मौजूद Screen तय करता है

क्या आपको नहीं लगता है कि आपने कल रात को आपको अपना एक बहुत जरूरी काम याद जो आपने सोचा कल इसे पूरा करना है, लेकिन सुबह उठते ही आपको वो जरूरी काम जो कल तक बहुत जरूरी था अब वो उतना जरूरी नहीं लगता? क्या आपको सुबह होते ही ऐसा नहीं लगता है कि अब क्या करूँ?

हम सभी के हालात कुछ ऐसे ही है, हमें सही में नहीं पता चलता अब की हमारे लिए वाकई क्या जरूरी है, हम अपने जीवन में क्या करना चाहते है, कहाँ पहुचना चाहते है ये सब कुछ हम दूसरो को देखते हुए कर रहे है, यहाँ तक की हम वो कर रहे है जो Screen पर हमें दिखाई दे रहा है

ये सब Internet के आने से पहले भी ये था लेकिन तब ये बहुत कम हुआ करता था, क्योंकि किसी के मन की बात जानने के लिए हमें उस समय बात करनी पड़ती थी, आज तो बात करना तो दूर की बात है मिलने की ज़रूरत भी नहीं, ये भी जरूरी नहीं कि एक दूसरे से जान पहचान भी हो, बस Screen पर दिखाई दे रहा है जिसे Music और Effects से सजाया गया है वो हमें अच्छा लगता है,

आज हम अपने 90% काम Screen के हिसाब से कर रहे है, वहाँ जो हमने देखा बस उसे अपना लिया लाइफ में,

आपके जीवन की दिशा आपका हाथ में मौजूद Screen तय करता है

क्या आपने गौर किया है, की आप ज्यादातर वही सोच रहे है और कर रहे है जो आपने अपने आसपास Screen पर देखा है, यहाँ तक कि आपको क्या खाना है, कहाँ खाना है, कितना खाना है ये सब कुछ आपका Screen तय करता है,

आप सही भी कर रहे हो तब भी आपको लगता है की मैं ग़लत कर रहा हूँ,

कुछ समय पहले तक अगर हमे किसी की वजह से कुछ बुरा लगता था तो हम उससे वो बात कहते थे, लेकिन अब हमें कुछ भी बुरा लगता है तो सबसे पहले पूरी दुनिया को बताते है अपने Status के ज़रिए, वो भी आधी अधूरी बात, कहानियों में, पहेलियों में, शायरी में,

बात यहाँ तक ठीक है कि आपको कुछ बुरा लगा आपने कहीं भी उसे लिख दिया अब आपका मन हल्का हो गया लेकिन – लेकिन जरा रुकिए,

हम 2 साल,5 साल के बच्चों को Wish कर रहे है उनके जन्मदिन पर अपने Status में, इसका क्या फ़ायदा,

क्योंकि किसी Celebrity ने ऐसा किया तो हम भी कर रहे है, भाई वो Celebrity जो ऐसा कर रहा है वो relevant रहने के लिए ऐसा कर रहा है, ताकि उसे आगे भी काम मिलता रहे, लेकिन हम क्या कर रहे है बस नकल कर रहे है,

ये हमारे लिए इतने खास क्यों है, हम क्यों हमेशा फिल्मी होने की कोशिश कर रहे है,

एक बच्चा जो अपने माँ बाप से कभी सीधे मुंह बात भी नहीं करता है वो भी Mothers Day के दिन अपने माँ – बाप की फोटो अपने Status में डालते फिरता है, ऐसा क्यों इसका क्या करोगे भाई, अगर बहुत ज़्यादा प्यार है तो माँ – बाप के पास बैठ जाओ ना, क्यों झूटी दुनिया में जी रहे हो, इससे क्या मिल जाएगा,

ऐसे कई उदाहरण है – जो हम अपने Daily Life में रोज़ाना कर रहे है, हम बस दूसरों की नकल कर रहे है, क्या हम Develop हो रहे है?

क्या हम ऐसा नहीं कर सकते है की अपने बच्चों को उन्हें इस तरह से Wish करें जो वाक़ई उनके इस Special दिन को खास बना दे, क्या अपने माँ – बाप के लिए हम हर दिन Special नहीं बना सकते,

कभी अगर मायूस हो जाये तो ख़ुद के साथ भी बैठे और खुद से पुछे की “कोई बात नहीं अगर इस बार फेल भी हो गए तो क्या हो गया” अगली बार फिर से मेहनत करेंगे,

Smartphone आपको वो देता है जो आप माँगते है

आज हम AI के जमाने में है जहाँ आपके Smartphone के हर Click को कोई ना कोई Tech Company Monitor कर रही है, ये इसलिए क्योंकि आपको इसके हिसाब से Content और ads दिखाया जा सके, इसमें उनका फायदा है,

आपने कभी Notice किया है की आपके Feed में ज्यादातर उसी तरह के Videos क्यों आते है जिन्हें आपने कभी ना कभी कहीं देखा हुआ है, आपने अभी किसी जूते के Ad पर Click किया तो अगले 24 घंटे में आपको बस जूतों की ही Ads क्यों दिखाई दे रही है Social Media पर,

ये इसलिए क्योंकि इन्हें इसी तरह से बनाया गया है, हाँ अभी भी कुछ चीज़ों का यहाँ ध्यान ज़रूर रखा जाता है, क्योंकि इंशानियत अभी भी कहीं ज़िंदा है, लेकिन आपको सामने वाली Screen ये आवाज नहीं निकलती दिखाई देगी की अब थोड़ा काम कर ले या बहुत देर हो गई थोड़ा आराम कर ले ये जरूरी है,

आपके Body और Mind के सभी Activity को बेशक आपका screen बताएगा, लेकिन आपको अपनी activity को ख़ुद ही समझना होगा, की आपके लिए क्या सही है और क्या ग़लत है, अगर आपने अपने life की डोर पूरी तरह से Screen के हवाले कर रखी है तो ध्यान रखिए आप थक जाएँगे लेकिन ये Machine नहीं,

क्या आप अपने लिए 24 घंटों के अलावा एक Second में अतिरिक्त ला सकते है जी नहीं है –

लेकिन Machine के पास ये capacity है कि आपको अगले 24 घंटों तक Screen के पास हमेशा बैठा सकती है, अगर आप थोड़े भी Unconscious हो, आपको बहला फुसला कर, बहुत प्यार से, जो आपको चाहिए, Virtual Reality के ज़रिए सब कुछ,

ये बस दिमाग़ से खेलना ही हुआ ना?

Conclusion

ये कहना पूरी तरह से ग़लत होगा की Screen को अपने Life से अब इस Digital World में निकला जा सकता है ये संभव नहीं है, लेकिन ये ज़रूर संभव है कि आपने दिमाग को Polluted होने से ज़रूर बचाया जा सकता है, ये तब होगा जब Screen time कम करेंगे, जब आप ये समझेंगे की बेशक बहुत सारा Content है Internet पर लेकिन मेरे लिए क्या जरूरी है मुझे क्या देखना/Consume करना चाहिए,

ये बात तो आप भी जानते है कि आप जैसा देखोगे वैसा ही आप सोचोगे, और जैसा सोचोगे वैसा ही आपका दिमाग़ काम करेगा और आप वैसे ही बन जाओगे,

अब ये तय करना आपके बस में है कि आपको अपने जीवन में वाकई क्या चाहिए, आपको किसे ना कहना है, क्योंकि आज का दौर ये नहीं है की आप Life में क्या चुनते है बल्कि ये है कि आप किन सारी चीज़ों को ना कहते है,

उम्मीद है आपको सही दिशा मिलेगी, कोई प्रश्न है तो अभी कमेंट में जरूर पुछे !!

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Naveen Pandey

लेखक परिचय: नवीन पांडे 18 वर्षों के लेखन अनुभव और 5000 से अधिक लेखों के साथ, नवीन पांडे एक अनुभवी कंटेंट क्रिएटर और 'माइंड दर्पण' के संस्थापक हैं। संघर्ष से सफलता तक के अपने सफर में उन्होंने डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी चुनौतियों को करीब से महसूस किया है। आज वे अपनी आगामी ई-बुक "Sharp Mind" और ब्लॉग के माध्यम से लोगों को सूक्ष्म आदतों (Micro-Habits) की शक्ति से परिचित करा रहे हैं। उनका मिशन मिडिल क्लास परिवारों के युवाओं को मानसिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें सफलता का एक सरल, व्यावहारिक रोडमैप प्रदान करना है। नवीन का मानना है कि छोटी-छोटी आदतें ही जीवन में बड़ा बदलाव लाती हैं।

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