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इस एक Habit की वजह से सालों पुराने रिश्ते भी टूट जाते हैं।

Published On: August 3, 2026
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एक habit और अपने कभी दूर नहीं होंगे

क्या आपने कभी गौर किया है अपने आसपास या अपने जीवन में की वो एक ऐसा पल जिसमे बहुत ही खास रिश्ते पल भर में क्यों टूट जाते है, आख़िर ऐसा क्या होता है कि जो relation हमें अपने जान से भी ज़्यादा प्यारा होता है उसे लेकर तुरंत ही हमारी राय बदल जाती है, तुरंत हम इसके against सूचना शुरू कर देते है,

ये गिनती इतनी ज़्यादा है की हर 10 में 10 इंसान किसी ना किसी बहुत अजीज रिश्ते को बस इस एक आदत की वजह से खो देता है, मैंने बहुत सारे लोगो को देखा है की वो इस रिश्ते को लेकर इतने ज़्यादा committed रहते है की उन्हें सामने वाले की गलती भी नहीं दिखाई देती है, लेकिन फिर ऐसा क्या हो जाता है कि ये इतना स्ट्रॉंग relation टूट जाता है,

मैंने तो 30 साल से साथ रहने वाले जोड़ो को बस इस एक आदत की वजह से एक दूसरे का साथ छोड़ते देखा है, हाँ उनमे से कुछ बेशक Toxic relation हो सकते है लेकिन बहुत सारे ऐसे रिश्ते टूट जाते है इस हैबिट की वजह से,

क्या आपने कभी महसूस किया है की आपने अपने किसी बहुत करीबी को Message किया किसी खास वजह से,

लेकिन सामने से replay आता है ठीक है, ये replay भी आपके उस जरूरी message के पक्ष में ही था लेकिन फिर भी आपको satisfaction नहीं होता, क्योंकि आप assume कर लेते है,

  • उसने ऐसा क्यों लिखा,
  • क्या वो मुझे ignore कर रहा है
  • क्या उसके जीवन में मुझसे भी जरूरी कुछ है
  • क्या वो मुझे अपने situation में involve नहीं करना चाहता
  • क्या सच में मुझे थोड़ा distance अभी maintain करना चाहिए
  • क्या वो मुझसे पिच्छा छुड़ा रहा है

ऐसी ना जाने कितनी ही जरूरी बातें आपके मन में घूमने लगती है, ऐसा नहीं है कि आप सामने वाले को जानते नहीं है आपने बहुत लंबा समय बिताया है लेकिन फिर भी आप बहुत सारे सवाल मन में लेकर घूमने लगते है,

लोगो के घर टूट जाते है इस assume करते रहने की वजह से, क्योंकि वो अपने दिमाग़ में हमेशा कुछ ना कुछ ग़लत prediction करते है अपने मन में,

10 में से 9 लोगो की आदत एक जैसी कैसे

हर इंसान एक दूसरे से बहुत अलग होता है, दिखने में भी और सोचने में भी और महसूस करने में भी, लेकिन ऐसा क्या होता है कि assume करने वाली आदत सबमे एक जैसी होती है,

उनके किसी दोस्त, रिश्तेदार, पत्ती, पत्नी, बाप, बेटा, बेटी यानी हर एक रिश्ते में हम assume करके चलते है,

सबसे कमाल की बात तो ये है कि हमें जितना जिससे लगाव होता है उतना ही उससे नफ़रत भी करने लगते है एक समय के बाद, बात कुछ नहीं होती लेकिन हम बस assume करने की वजह से अपने सालों पुराने सबसे खास रिश्ते को तोड़ देते है,

हम सभी के Life में ये एक Situation बहुत ज़्यादा Common होती है, ज्यादातर लोगो के साथ,

हमने किसी बहुत करीबी को कोई SMS भेजा, सामने से जवाब आया ठीक है, अब हमारा दिमाग़ ये सोच रहा होता है कि इतना formal जवाब, आख़िर क्यों,

अब क्योंकि हमने इतना formal जवाब नहीं expect किया था तो हमें उस समय बुरा लगा, अब सामने वाले इंसान को ज्यादातर इसके बारे में नहीं पता होता, उसके बाद आगे हमारा behaviour उस इंसान के साथ बदल जाता है,

हम भी उसी तरह से treat करते है सामने वाले को, सामने वाला इस उधेड़बुन में है कि आख़िर मैंने ऐसा क्या किया, कुछ दिन पूछते – पुछते अब दोनों तरफ़ से ignorance शुरू हो जाति है, इस तरह बात धीरे धीरे बढ़ते बढ़ते इतनी बढ़ती है कि हमें ये पॉइंट बहुत बड़ा लगने लगता है और हम उस खास रिश्ते को तोड़ देते है,

लेकिन जरा सोचिए हम इस तरह से भी तो सोच सकते है की सामने से replay आया था ठीक है तो इसकी कोई वजह हो सकती है,

  • हो सकता है सामने वाला इंसान Busy हो कोई जरूरी काम कर रहा हो
  • हो सकता है सामने वाला इंसान किसी Meeting में हो जहाँ लम्बा text करने की possibility ना हो
  • हो सकता है उस समय कोई और दूसरी बात दिमाग़ में चल रही हो
  • हो सकता है कि उसने उस काम की हामी भड़ी है और ठीक है लिखा भी है, लेकिन क्योंकि text में emotion नहीं दिखते तो शायद हो सकता है कि आपको सामने वाले की intension ना समझ में आई हो
  • ये भी हो सकता है कि आपके दिमाग़ में ही किसी दूसरी बात को लेकर कोई जिझक चल रही थी, आप stress में थे

हाँ ये भी हो सकता है कि सामने वाले का intention हो सकता है कि आपसे पीछा छुड़ाने की, लेकिन उसके लिए क्या आपके पास कोई पुख्ता, टोश वजह मिले, कोई सबूत मिला, अगर नहीं तो ये बस आपके सोचने की वजह से खराब हुआ, आपके अपने situation को worst बना लिया, ख़ुद से ही,

क्या आपने जानना चाहा की यहाँ ऐसा क्या हुआ,

ये भी नहीं होना चाहिए कि आप किसी रिश्ते पर आँख मूद कर भरोसा करने लगे लेकिन तब तक आप उसे ग़लत नहीं बोल सकते जब तक की उसकी कोई वजह ना हो,

लेकिन हम सब कुछ तोड़ देते है अपने assume करने की वजह से,

सालो पुराने रिश्ते का Secret – Assume Positive Intent

आपको सबसे कमाल की बात बताता हूँ, आपके माँ बाप या आपके दादा – दादी पिछले 50 सालों से साथ है, उनके दोस्त रिश्तेदार जिससे उनके रिश्ते करीब करीब 50 साल से भी ज़्यादा पुराने हो चुके है, और हम ज़्यादा से ज़्यादा 5 से 10 साल किसी रिश्ते को आगे लेकर जा पातें आख़िर ऐसा होता क्यों,

वो लोग आख़िर ऐसा क्या करते थे जिसकी वजह से उनके पुराने रिश्ते में आज भी बहुत चमक है दम, जरा सोचिए – मुझे लगता है Assume Positive Intent की वजह उनके इतने पुराने रिस्तों को भी निभा पा रहे है,

Assume Positive Intent ये कहती है कि आप जो assumption कर रहे है की काश ऐसा हो सकता है, उसने negative के बजाय positive रखो अगर आपको कोई टोश वजह नहीं मिल रही, आप अगर message में replay ठीक है मिला तो आप ये सोच सकते है की

  • हो सकता है सामने वाला इंसान Busy हो
  • हो सकता है ऐसी situation ना हो की लंबे SMS भेज पाये

यानी जो भी सोच रहे है उसके ठोस वजह मिलने तक किसी को blame मत करो, क्योंकि जबान चाहे कितना भी आपको बोले, आँखे और हरकत बता देती है कि इंसान झूट बोल रहा है या क्या चाहता है,

उसके बाद भी ईसान को थोड़ा समय देना ही चाहिए, अगर कोई ठोस वजह मिल भी जाये तो हो सकता है ये बस एक गलती हो, तो थोड़ा रुकिए देखिए की सामने वाला का intent क्या है, अगर intent दिखाई दे रहा है की वो replay बस एक गलती थी, तो भूल जाइए,

रिश्ते जरूरी है, ग़लतियाँ हो जाती है, उसे बार बार दिमाग़ में गलत बनाने से आप ख़ुद से लड़ेंगे, अपनी सोच से लड़ेंगे,

और ये लड़ाई आपकी ख़ुद से होगी, आप नहीं चाहोगे की आपका मैं कभी हारे, इसलिए आप उस झूट को भी सही मान लोगे, जिसकी वजह से आपके खास रिश्ते टूट जाएँगे,

Conclusion

रिस्तें सभी अज़ीज़ होते है अपनी अपनी जगह पर, अगर आप रिस्तों के इंटेंशन को जानते हो तो negative assumption करना छोड़ दो, क्योंकि ये prediction ज्यादातर हम अपने द्वारा बनाये गए situation आधार पर लेते है ना की उस situation के reality की वजह से,

मैं आपसे ये नहीं कह रहा हूँ की आप आँख मुद लो चाहे आपको कुछ भी दिखाई दे रहा हो,

मैं आपसे बस ये कह रहा हूँ की जो भी situation है उसे break down करो, उसे पत्थर की लकीर मत मान के बैठ जाओ, गलती आपकी भी हो सकती है, इसलिए ख़ुद को और उस रिश्ते को एक assumption की वजह से ख़त्म मत करो,

Action Step

अगर आपको SMS का replay बस ठीक है आया है और आप इससे कुछ ज़्यादा चाह रहे थे, तो ख़ुद से कहानी बनाने के बजाए, कोई फ़ैसला सुनाने के बजाए, सामने वाले से अपनी सोच बताओ की आप इसको लेकर क्या सोच रहे हो और उसके बाद सामने वाले की सुनो, अगर उस replay में कोई वजह दिखाई दे रही है, और वो सही है,

तो आपका खास relation टूटने से बच जाएगा, अगर बस आपको गोल गोल घुमाया जा रहा है तो आप उस toxic relation से बच जाओगे, जिसमे आपको आगे कोई guilt नहीं रहेगा, की शायद मैं ही ग़लत था या ग़लत थी,

ये SMS बस एक उदाहरण था, आपके साथ अलग अलग situation आ सकती है, सबको समय दो और breakdown करने के बाद ही किसी फ़ैसले पर पहुचो,

उम्मीद है इस पोस्ट से आपके सोचने के नजरिया बदलेगा, कोई प्रश्न या सुझाव हो तो comment में लिखो, आपके कीमती समय के लिए दिल से धन्यवाद, आपका दिन हमेशा शुभ रहे,

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Ye post kaam ka laga? Inme se aapki problem kaunsi hai?

Har ebook ek problem ka seedha hal hai. Jo baat aap par fit baithe, use kholiye.

Naveen Pandey

लेखक परिचय: नवीन पांडे 18 वर्षों के लेखन अनुभव और 5000 से अधिक लेखों के साथ, नवीन पांडे एक अनुभवी कंटेंट क्रिएटर और 'माइंड दर्पण' के संस्थापक हैं। संघर्ष से सफलता तक के अपने सफर में उन्होंने डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी चुनौतियों को करीब से महसूस किया है। आज वे अपनी आगामी ई-बुक "Sharp Mind" और ब्लॉग के माध्यम से लोगों को सूक्ष्म आदतों (Micro-Habits) की शक्ति से परिचित करा रहे हैं। उनका मिशन मिडिल क्लास परिवारों के युवाओं को मानसिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें सफलता का एक सरल, व्यावहारिक रोडमैप प्रदान करना है। नवीन का मानना है कि छोटी-छोटी आदतें ही जीवन में बड़ा बदलाव लाती हैं।

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