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आप जिस बात को भूल नहीं पा रहे… शायद वही सबसे ज़रूरी है।

Published On: July 9, 2026
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बार बार याद आने वाली बात को मत दबाओ

क्या आपने कभी नोटिस किया है ज्यादातर हमारा मन कब भटकता है और हम अपने बहुत ज़्यादा जरूरी काम को भी सही ढंग से नहीं कर पातें, हम चाहे कितना भी प्रयास कर लें हम फोकस कर ही नहीं पातें अपने उस काम पर, और जब ऐसा होता है हम बाहरी चीज़ों को देखते है की शायद, गर्मी है, शोर्ट है, या अलग अलग बाहरी चीज़ें,

जब ये स्थिति बहुत दिनों तक चलती है और हम फोकस नहीं कर पातें है तो हमें ये विश्वास हो जाता है कि ज़रूर हमारे अंदर कोई ऐसी स्थिति है जिसकी वजह से हम फोकस नहीं कर पा रहे है,

यहाँ कुछ बार के लिए हो सकता है कि कोई फिजिकल चीज़ें, जैसे सेहत, आसपास का माहौल की वजह से हम फोकस नहीं कर पातें, लेकिन ज्यादातर समय में करण कुछ और होता है,

1920 में एक मानोबैज्ञानिक “ब्लुमा ज़िगार्निक” ने एक बात का शोध किया था कि की “हमारा ध्यान ज्यादातर इसलिए भटकता है क्योंकि वो कुछ अधूरी काम जो किसी भी वजह से छूट गए हो उसे पूरा करा चाहता है, इसलिए बार बार उसे याद करता है, ये एक खुले हुए लूप की तरह होता है, इसे जितनी जल्दी बंद कर दिया जाये उतनी जल्दी हम फोकस कर सकते है,

जिस बात को भूल नहीं पा रहे उसे पूरा करिए

आज से कुछ साल पहले तक बहुत कम जानकारियां हुआ करती थी, हम मेंटली बहुत सारे काम नहीं करते थे, हम ज्यादातर इन्वॉल्व रहते थे जो भी काम करते थे, लेकिन आज हम पूरे दिन भर में ना जाने कितनी जानकारी इक्कठा करते है अलग अलग तरह से, जिसे दिमाग़ प्रोसेस करना चाहता है,

अब क्योंकि ये जानकारियाँ बहुत ज़्यादा है तो ज्यादातर को दिमाग़ स्किप कर देता है,

लेकिन उसमे से कुछ को दिमाग़ नहीं भूल पाता वो और जानना चाहता है उसे पूरा करना चाहता है लेकिन नहीं कर पाता, और जैसे ही हम किसी काम को करने बैठते है थोड़े शांत होते है हमें वो बात याद आ जाती है,

सोचिए ऐसा कई बार आपके साथ हुआ है कि जब आप सोने जाते है अचानक से आपको सुबह वाली एक रील याद आ जाती है जिसे आपने देखी है, ये आपके पर्सनालिटी के हिसाब से होता है, जैसे मान लीजिए कि आप खाना खाने के शौक़ीन है और आपने कोई रील देखी थी जो किसी लज़ीज़ खाने के बारे में थी,

अब जैसे ही सोने गए आपको वो लज़ीज़ खाने वाली रील याद आ गई, अब आप तुरंत ही सोना छोड़ कर उसे अपने दिमाग़ में अलग अलग तरह से प्रोसेस करने लगते है, की स्वाद कैसा होगा, मैं भी किसी दिन बनाऊँगा या खाऊँगा, ऐसे कई सारी बातें,

मान लीजिए आपने पूरे दिन में अलग अलग तरह से ढेर सारी जानकारियां इक्कठा किया या अलग अलग तरह के काम किए, ये सभी आपके दिमाग़ के ओपन लूप है क्योंकि आपने इन्हें पूरा नहीं किया है, अब जब भी आप शांत होंगे या फोकस करने की कोशिश करेंगे आपको वो सारे काम याद आने शुरू हो जाएँगे,

आप एक से दूसरे पर स्विच करते रहेंगे अपने दिमाग़ में, लेकिन एक भी काम को पूरा नहीं करेंगे, क्योंकि आपका दिमाग़ लगातार चल रहा है, इसलिए आपकी एनर्जी भी बर्न हो रही है, जिसकी वजह से शाम होते – होते आप पूरी तरह से थक जाते हो,

आप सोचते हो की आज पूरे दिन का समय ऐसे ही निकल गया कुछ किया ही नहीं फिर भी, आपको पता ही नहीं है कि आपका दिमाग़ बहुत सारी चीज़ों को पहले से प्रोसेस कर रहा है,

आपके अधूरे काम आपको फोकस नहीं करने देते

क्या आपने कभी गौर किया है की आप किन किन कारणों से अपने दिमाग़ में एक ओपन लूप बनातें है, ये बहुत छोटी छोटी बातें है जहाँ दिमाग़ आपको कभी जाता ही नहीं है, आप बस आगे बढ़ते जाते है, और परेशान रहते है हमेशा-

  • बिना आपके जरूरत की जानकारी इक्कठा करते है अलग अलग तरह से,
  • बहुत सारी आधी अधूरी वीडियोज़ देखते है अलग अलग जगह पर जो कंटेक्स्ट पूरा नहीं करती,
  • हमेशा ख़ुद को कंपेयर करते है अपने आसपास के माहौल से
  • आप क्या है आपकी पर्सनालिटी क्या है कभी इसके बारे में ध्यान नहीं देते
  • आप भीड़ का हिस्सा बने रहने में सहज महसूस करते है
  • एक समय पर एक से ज़्यादा काम करते है जिसकी वजह से किसी काम को पूरा नहीं करते
  • आपके अगले दिन का कोई प्लान नहीं है होता कभी भी
  • आप कभी ही अकेला नहीं बैठना चाहते है ख़ुद को महसूस नहीं करना चाहे है
  • अपने अंदर की कमजोरी आपको पसंद नहीं उन्हें कभी भी देखना उसपर काम नहीं करना चाहते है

ऐसे ना जाने कितने ही काम आप पूरे दिन भर करते है जिसकी वजह से आपका दिमाग़ आपको सिग्नल दे रहा होता है बार बार, लेकिन आप एक बार भी उसे सुनते ही नहीं कि आख़िर क्या वजह है जो मेरा मन हमेशा भटक रहा है,

मुझे लगता था हमेशा कुछ छूट रहा है –

कुछ साल पहले करीब 2007 से 2019 तक मैं कभी भी भीतर से शांत ही नहीं रह पाता था, मैं कहीं भी ठीक के बैठ ही नहीं पाता था हमेशा लगता था कुछ ना कुछ छूट रहा है, अंदर एक अज़ीप से बैचनी फील करता था,

जब भी मैं किसी काम को करता था, मुझे लगता था इसमें मैं अपना समय बर्बाद कर रहा है हूँ, मुझे कुछ और करना चाहिए, जिससे तुरंत रिजल्ट मिल जाये, इस हैबिट की वजह से जिस दिन मेरे हिसाब से रिजल्ट नहीं आता था मैं उस दिन बहुत ज़्यादा निराश हो जाता था, मुझे लगता था मैं ही दुनिया का सबसे बेचारा इंसान हूँ,

इसकी वजह से मैं धीरे धीरे एंजाइटी का शिकार भी हो गया, मुझे हमेशा लगने लगा कि अगर मैं फेल हो गया तो क्या होगा, सर्वाइव करने का डर सबसे ज़्यादा लगता था, लेकिन 2019 के अंत से मुझे सब कुछ समझ आने लगा की आख़िर मेरे परेशानी क्या है, वो थी फाइनेंशियली वीक होना,

अब ये तो आम बात है कि अगर आप आज Financially week हो तो आपको उसपर मेहनत करनी होगी और ख़ुद को मज़बूत बनाना होगा पैसे से, और जब तक ये पूरा नहीं होता हमें डर – डर के जीवन जीना चाहिए, ऐसे में तो इसकी कोई गारंटी नहीं है कि जब पैसा आ भी जाएगा तो भी आप खुश होगे,

ये एक काम करिए फोकस कई गुना बढ़ेगा

2020 की शुरुआत में मेरे अंदर एक हैबिट डेवलोप हुई अचानक से, इसे मैंने कहीं पढ़ा ही था, मैं जब भी सोने जाता था, मैं अपने सभी विचार को लिख देता था, चाहे कुछ भी, डर, जरूरत, महसूस करता था, आगे का गोल, अगला कदम, सब कुछ लिखने लगा, और अंत में मुझे ये भी डर रहता था कि अगर किसी ने इसे पढ़ लिया तो क्या सोचेगा मेरा बारे में, यानी इमेज मेरी ख़राब होगी,

इसके लिए मैं लिखने के बाद सब कुछ उस कागज को फाड़ दिया करता था, धीरे धीरे जैसे 6 महीने बीतें, मैंने नोटिस किया कि मैं एक जगह पर आराम से बैठने लगा, मैं पहले से ज़्यादा फोकस करने लगा किसी भी काम पर,

मैं 250 पेज की बुक को महार 4 दिन में पूरा किया है कई बार, हालाकि ऐसा हमेशा नहीं करता हूँ, क्योंकि और भी जरूरी काम है, पहले जो मैं हमेशा भटकते रहता था, जो हमेशा डर रहता था अब सब कुछ ख़त्म हो चुका है, पूरी तरह से नहीं लेकिन 90% ख़त्म हो चुका है,

इससे आज मैं सुकून महसूस करता हूँ, इसकी वजह है 2020 में ही मैं समझ गया की आख़िर मैं स्टेबल कब और कैसे रह सकता हूँ, इसपर तब से काम कर रहा हूँ और आज ख़ुशी है कि एक हैबिट बस अपने विचार को लिखने की जिसकी वजह से मैं मेंटली स्टेबल हो पाया,

मुझे लगता है जैसे ही मैं अपने विचार लिखता हूँ, मैं कई सारे दिमाग़ के ओपन लूप को बंद कर देता हूँ, इसे ऐसे समझिए, आप कुछ ख़रीते है और उसे संभार कर जब रख देते है आप पूरी तरह से निश्चिंत हो जाते है, ठीक इसी तरह से लिख देने से आपके दिमाग़ को लगता है की अब आपके दिमाग़ में कुछ भी सोचने जैसा नहीं बचा,

Conclusion

अगर आप भी एक काम करते समय दूसरे काम के बारे में सोचने लगते है और उस वजह से आपका पहला वाला काम नहीं हो पाता है जो बहुत ज़्यादा ज़रूरी है, तो अपने विचार को हर रात लिखना शुरू कर दीजिए,

पहले दिन आपको पता नहीं चलेगा की शुरू कहाँ से करना है, जब आप लिखने बैठेंगे तो आपको लगेगा क्या नाटक कर रहा हूँ इससे क्या होगा, लेकिन सब मानिए ये काम करता है, जब आप करेंगे धीरे धीरे आप शांत होंगे और फोकस भी कर पाएंगे अपने हिसाब से,

उम्मीद करता हूँ इस आर्टिकल से आपके जीवन को एक दिशा मिलेगी, कोई प्रश्न या सुझाव हो तो अभी कमेंट में लिखिए, मुझे खुशी होगी, आपके कीमती समय के लिए दिल से धन्यवाद, आपका दिन हमेशा शुभ रहे !!

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Ye post kaam ka laga? Inme se aapki problem kaunsi hai?

Har ebook ek problem ka seedha hal hai. Jo baat aap par fit baithe, use kholiye.

Naveen Pandey

लेखक परिचय: नवीन पांडे 18 वर्षों के लेखन अनुभव और 5000 से अधिक लेखों के साथ, नवीन पांडे एक अनुभवी कंटेंट क्रिएटर और 'माइंड दर्पण' के संस्थापक हैं। संघर्ष से सफलता तक के अपने सफर में उन्होंने डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी चुनौतियों को करीब से महसूस किया है। आज वे अपनी आगामी ई-बुक "Sharp Mind" और ब्लॉग के माध्यम से लोगों को सूक्ष्म आदतों (Micro-Habits) की शक्ति से परिचित करा रहे हैं। उनका मिशन मिडिल क्लास परिवारों के युवाओं को मानसिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें सफलता का एक सरल, व्यावहारिक रोडमैप प्रदान करना है। नवीन का मानना है कि छोटी-छोटी आदतें ही जीवन में बड़ा बदलाव लाती हैं।

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