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दिन भर Busy रहने के बाद भी लगता है कि कुछ किया ही नहीं? असली वजह Time नहीं है !

Published On: June 27, 2026
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Busy... फिर भी आगे नहीं बढ़ रहे?

क्या कभी आप मेहनत करने के बाद उससे मिलने वाली प्रोग्रेस को देखते हो, शायद नहीं, हम में से ज्यादातर लोग बस मेहनत करते है और खुश हो जाते है कि आज इतना काम कर लिया और चैन से सो जाते है, लेकिन कई साल उसी तरह से मेहनत करने के बाद हमें उतना रिजल्ट दिखाई ही नहीं देता जिसके ड्रीम हमने अपने मन में बुने होते है,

नतीजा कुछ दिनों के बाद हम उस काम को ही छोड़ देते है और दूसरा काम करने लगते है, अपने गोल बदल देते है, ऐसी हालत ज्यादातर हमारी 20 और 30 की उम्र में होती है, अब आप सोचेंगे अब इसमें क्या किया जाये ये तो किशमत है, लेकिन अगर मैं आपसे ये कहूँ की ये किशमत नहीं है बल्कि आप जिस दिशा में काम कर रहे है और जिस तरह से कर रहे है आपको उतना ही रिजल्ट मिल रहा है तो शायद आप सोचने लगे,

यहाँ कंटेक्स्ट ये है की हम अपना ज्यादातर समय बर्बाद कर देते है, हम कभी भी ये नहीं सोचते की हमारा समय बहुत ज़्यादा इंप्रोटेंट है बल्कि हम ये सोचते है की काम ज़्यादा जरूरी है, हाँ काम जरूरी है तब जब आप निर्धारित समय पर उसे पूरा करे,

अगर जिस काम को 1 घंटे में पूरा किया जाना चाहिए उसे करने में आप 10 दिन लगा दे तो आपको क्या लगता है कि आपको उस तरह से रिजल्ट मिलेगा, जो आप सोच रहे है, नहीं कभी नहीं।

दिन भर Busy रहने के बाद भी लगता है ना कि कुछ किया ही नहीं?

अगर आप ध्यान दें तो आप पाएंगे कई बार ऐसा होता है कि आप पूरे दिन busy रहते है लेकिन आपको ये एहसास हो जाता है कि आज का दिन वाक़ई बहुत ज़्यादा प्रोडक्टिव नहीं है, क्योंकि इसकी वजह होती है कि आप किसी भी काम को करने में कितना समय लगाते है,

कई बार ऐसा होता है कि आपको कोई काम करना है तो आप बीच में बहुत बड़ा गैप ले लेते है जिससे आपको दुबारा शुरू करने में बहुत समय लगता है, क्योंकि आपका दिमाग़ उस फ्लो से बाहर निकल जाता है, फिर दुबारा उस फ्लो में आने में उसे समय लगता है,

कई बार आपने देखा है कि आप कुछ काम कर रहे है अचानक से एक छोटे से डिस्ट्रकशन की वजह आप उस काम को दुबारा शुरू ही नहीं कर पातें है,

मैं कई बार इसे महसूस किया है –

कुछ साल पहले तक जब मैं आप लोगो के लिए आर्टिकल, ब्लॉग लिखता था और स्मार्टफोन मेरे पास होता था जैसे ही मैं स्मार्टफोन को हाथ में लेता था कई बार कई कई मिनट पता नहीं कब निकल जाता था पता नहीं नहीं चलता था, कई बार तो मैं ये भी भूल जाता था कि आख़िर अभी मैं क्या कर रहा था,

फिर जब याद आता था तो दुबारा शुरू करने में मुझे समय लगता था,

यानी जिस काम को कुछ मिनट में पूरा हो जाना चाहिए होता था उसे करने में मुझे कई घंटे लग जाते थे, क्योंकि मैं बीच में डिस्ट्रैक्ट हो जाता था, अब आपकी बारी क्या आपके साथ ऐसा नहीं होता था कि जब आप कोई काम करने की सोच रहे है और आपका फ़ोन आपके हाथ में आप स्मार्टफोन स्क्रॉल करते हुए ये भूल जाते है की आख़िर मुझे अभी करना क्या था,

आज हम सभी के साथ ऐसा लगभग हो रहा है हम किसी भी काम को करने में बहुत ज़्यादा समय ले रहे है, हम 5 मिनट में कहीं जाने वाली बात को कहने में कई बार घंटों ले लेते है और कई बार उसे कह भी नहीं पातें,

उदाहरण के तौर पर इसे जरा देखिए –

  • आप किसी दोस्त से फ़ोन पर बात करते है और कुछ मिनट की बात को घंटों में तक करते है !
  • सुबह में समय पर कहीं पहुचने के बजाये आप देर से पहुचते है क्योंकि आप समय पर निकल ही नहीं पातें घर से !
  • आप स्मार्टफोन को अपना कोई जरूरी बिल पे करने, ग्रोसरी खरीदने या कोई जरूरी शॉपिंग के लिए हाथ में लेते है और कुछ और देखने लगते है, जिससे समय बर्बाद होता है और आप समय पर उसे पूरा कर ही नहीं पातें है !
  • आप काम के करने के दौरान लंच के लिए ब्रेक लेते है और कुछ और करने लगते है जिससे आप समय पर लंच नहीं करते और उस वजह से काम शुरू नहीं हो पाता है समय पर !
  • आपके पास जरूरी कामों की लिस्ट ही नहीं है आप जो सामने आता है उसे करना शुरू कर देतें है !
  • दिन में कुछ देर के लिए आराम करने गए और कई घंटे सो लिए !

ऐसे ना जाने कितने हैबिट है हमारे जिनकी वजह से दिन भर हम अपना समय बर्बाद करते है और उस समय से हमें अपने लाइफ में बहुत कुछ करते हुए भी रिजल्ट नहीं मिलता है,

इसकी वजह हम वो काम ज़्यादा करते है जिसका रिजल्ट हमारे लाइफ में बस 20% आता है, हम वो काम करते ही नहीं है कि जिसका हमारे जीवन पर 80% असर होता है, और यही वजह है कि हम बिजी तो रहते है लेकिन कुछ अचीव नहीं कर पातें,

समय पर काम पूरा करने के लिए Timer इस्तेमाल करता हूँ

कुछ साल पहले तक मैं भी जैसे तैसे काम करता था, मैं ये भी नहीं देखता था कि मैंने कितना समय लिया किस काम को करने में, जिससे समय तो बीत जाता था लेकिन काम समय पर पूरा नहीं होता था, इसलिए घंटों के काम को कुछ दिन में पूरा करता था,

लेकिन उसके बाद मैंने अपने हर काम को एक टाइम स्टाम्प देना शुरू कर दिया, अब आप सोचेंगे की जीवन में इतना कैलकुलेटिव कैसे कोई हो सकता है शायद आपकी बात सही है लेकिन मैं सोचता हूँ कि दिन का पहले सदुपयोग उसके बाद जो समय बच जाये उसे फिर जैसे इस्तेमाल करे आपकी मर्जी,

जैसे सोचिए की आपके पास एक ग्लास है (जो समय है), अब उस ग्लास में आपकी मर्जी है आप क्या रखते है, अगर आप उस ग्लास का इस्तेमाल पानी रखने के लिए करते है या पूरी ग्लास में रेत भर लेते है, पानी आपके काम आयेगा, रेत को आपको फेकना ही पड़ेगा, इसी तरह से जीवन में जो समय आपको काम करने के लिए मिलता है उसे अगर बर्बाद करेंगे तो कल वही समय आपको अपने हिसाब से घुमायेगा,

मैं अपनी सभी प्रोडक्टिव काम के लिए Timer इस्तेमाल करता हूँ

ये टाइमर मुझे मदद करता की मैं किस काम को कितने समय में पूरा करूँगा और कहाँ मेरा समय बर्बाद हो रहा है जैसे –

  • मैं सुबह में बुक Read करने के लिए 45 मिनट टाइमर इस्तेमाल करता हूँ
  • एक्सरसाइज करने के लिए 45 मिनट टाइमर इस्तेमाल करता हूँ
  • अपने आर्टिकल लिखने के लिए 120 मिनट टाइमर का इस्तेमाल करता हूँ जो क़रीब क़रीब 1000 शब्द का होता है
  • मैं लंच ब्रेक के लिए 60 मिनट का टाइमर इस्तेमाल करता हूँ,
  • हर काम को करते समय 30 मिनट के बाद 5 मिनट का ब्रेक लेता हूँ जिसे पोमोडोरो भी कहते है
  • मैं Video Content के लिए भी 120 मिनट कर टाइमर इस्तेमाल करता हूँ
  • यहाँ तक कि मैं ये भी देखता हूँ कि आज का जो मेरा काम है उसे मैंने पूरा करने में कितन समय लिया
  • उसके बाद जब मैं कोई OTT देखता हूँ तो वहाँ भी ज़्यादा से ज़्यादा 60 मिनट का टाइमर इस्तेमाल करता हूँ

ऐसे कई टाइमर मैं अपने पूरे दिन में इस्तेमाल करता हूँ, अब आपको लग रहा है इतना कौन करता है, मैं इसलिए करता हूँ क्योंकि मैं अगर किसी काम को बहुत ज़्यादा समय दे दूँगा तो अगला काम नहीं होगा,

या अगर कम समय देता हूँ तो उस काम की क्वालिटी कम हो जाएगी, एंटरटेनमेंट में ज़्यादा समय देता हूँ तो ये भी समय वेस्ट करने जैसा ही है, इसलिए मैं अपने समय को ट्रैक करता हूँ,

मैं अपने इस काम को प्रायोरिटी के हिसाब से रखता हूँ, यानी मैं वही काम ज्यादातर करने की सोचता हूँ जिसमे 80% रिजल्ट आए, कई बार ये काम करता है,

ऐसा नहीं है कि मैं किसी दोस्त से फ़ोन पर बात कर रहा हूँ तो मैं सब काम छोड़ कर पूरे दिन उसी में लगा रहता हूँ, हाँ काम पूरा करने के बाद बेशक घंटों बात किया जा सकता है,

20 और 30 की उम्र में बहुत जरूरी है

वैसे तो समय का सही इस्तेमाल हर उम्र में बहुत जरूरी है, लेकिन ख़ाशकर जब आप 20 और 30 की उम्र में है तो आपको ये 3 जरूरी बातें ज़रूर ध्यान में रखनी चाहिए क्योंकि यही समय है जिससे आप अपने कल बेहतर कर सकते है या कल बर्बाद कर सकते है –

Time Audit – अपने इस उम्र में टाइम ऑडिट जरूर करें, की आपने अपना कीमती समय कहाँ और किस काम के लिए खर्च किया, अगर कुछ प्रोडक्टिव किया तो कितने देर में किया, और अगर टाइम वेस्ट कर दिया तो कहाँ किया, अगर आप इस तरह से देखेंगे तो आप ज्यादातर अपने सभी जरूरी कामों को समय पर पूरा करना शुरू कर दोगे,

Priority List – इस उम्र में सबसे जरूरी है कि अपने सभी काम कामों के प्रायोरिटी को पहचानना, की कौन सा काम मेरे लिए कितना जरूरी है, क्योंकि अगर आप कोई ऐसा काम कर रहे जिसे अभी नहीं भी करते तो काम चल सकता था, या कोई ऐसा काम छोड़ देते हो जिसे अभी करने से रिजल्ट बहुत अच्छा आता तो शायद आप समय बर्बाद ही कर रहे हो,

Planning – अगर आपको समय अपना सही इस्तेमाल करना है तो अपने जीवन के हिसाब से काम को एक टाइम स्टाम्प देना शुरू कर दो, की कौन सा काम किस काम के बाद करूँगा और कितने देर के लिए करूँगा, ऐसा करने से बैलेंस बना रहेगा, आपको पता भी नहीं चलेगा की आप वाकई अपने उस दिन को प्रोडक्टिव बना चुके हो,

आपकी सबसे बड़ी सम्पत्ति आपका समय है इस उम्र है अगर आप अभी अपने इस समय का सही इस्तेमाल करेंगे तो कल का समय आपका होगा अगर अभी बर्बाद करेंगे तो कल ये समय आपको अपने हिसाब से इस्तेमाल करेगा,

Conclusion

आप जिस भी सफल इंशान को अभी देख रहे हो वो सभी समय के धनी थे पहले उसके बाद आज उन्हें आप सफल देख रहे थे, आपको एक भी ऐसा सफल इन्शान नहीं मिलेगा जो अपने समय को बर्बाद करके भी सफल हो पाया है, उन सभी ने समय पर सही काम किया और उसी का नतीजा है कि वो आज वहाँ है,

हम लोग समय को कोई वैल्यू नहीं देते क्योंकि हमें उसे ख़रीदना नहीं पड़ता, इसलिए हम उसका हिसाब भी नहीं रखते, हमें लगता है आज समय बर्बाद कर दिया तो क्या हो गया कल का दिन तो है ना, जब की हो सकता है कि जिस काम को आप अभी करने जा रहे हो उसका सही समय कल ही बीत गया है,

इसलिए ख़ाशकर जब आप शुरुआत कर रहे हो 20 और 30 की उम्र में हो तो समय को बहुत ज़्यादा अहमियत दो क्योंकि यही आपके पास अभी पूंजी है और इसी से आप अपने फ्यूचर को क्रिएट करोगे,

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Ye post kaam ka laga? Inme se aapki problem kaunsi hai?

Har ebook ek problem ka seedha hal hai. Jo baat aap par fit baithe, use kholiye.

Naveen Pandey

लेखक परिचय: नवीन पांडे 18 वर्षों के लेखन अनुभव और 5000 से अधिक लेखों के साथ, नवीन पांडे एक अनुभवी कंटेंट क्रिएटर और 'माइंड दर्पण' के संस्थापक हैं। संघर्ष से सफलता तक के अपने सफर में उन्होंने डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी चुनौतियों को करीब से महसूस किया है। आज वे अपनी आगामी ई-बुक "Sharp Mind" और ब्लॉग के माध्यम से लोगों को सूक्ष्म आदतों (Micro-Habits) की शक्ति से परिचित करा रहे हैं। उनका मिशन मिडिल क्लास परिवारों के युवाओं को मानसिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें सफलता का एक सरल, व्यावहारिक रोडमैप प्रदान करना है। नवीन का मानना है कि छोटी-छोटी आदतें ही जीवन में बड़ा बदलाव लाती हैं।

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