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17 साल बाद समझ आया ये 2 तरह के लोग हमेशा सफल होते है !!

Published On: June 19, 2026
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17 साल बाद समझ आया ये 2 तरह के लोग हमेशा सफल होते है !!

आज 2026 से जब मैं 2017 को देखता हूँ तो सोचता हूँ कि काश ये बात मुझे पहले पता होती या किसी ने समझाई होती तो शायद बहुत सारा समय बर्बाद होने से बच सकता था, लेकिन कोई बात नहीं इस समय में मैंने बहुत कुछ सीखा, अगर आप भी 20 की उम्र ये सोच रहे है की सफल होने के लिए कोई रोडमैप कोई दे देता,

तो ये है आपके लिए रोडमैप जो किसी किताब में आपको शायद ही पढ़ने के लिए मिलेगी, इसलिए कुछ मिनट निकालिए और पढ़िए, क्या पाता आपका विजन क्लियर हो और आप ये समझ सके की वाक़ई अगर आपको कुछ पाना है तो उस तक आप कैसे पहुँच सकते है,

यकीन मानिए ये “सफल” शब्द के पिछे इतना समय अपना बर्बाद किया है ना की मुझे कभी कभी अपने आप के ऊपर हंसी आती है,

आगे बढ़ने से पहले आपको एक बात साफ़ कर देना चाहता हूँ, आप चाहे किसी भी जगह पर है अपने लाइफ में, चाहे आपके पास रिसोर्सेज है या नहीं, आप जरूर वो पा सकते है जिसके बारे में आप अपने मन में हमेशा सोचते है, जी हाँ, मैं आपको ये लिख कर दे सकता हूँ, लेकिन – लेकिन इन 2 तरह के केटेगरी में आपको आना होगा,

20 और 30 की उम्र में हमें यही बताया जाता है

मुझे या आपको हम सभी को हमारे 20 की उम्र में बस एक ही बात बताई जाती है जो भी आधी अधूरी, की अगर आपको आपके लाइफ में कुछ भी पाना है तो आपको मेहनत करनी होगी, ये सही भी है, लेकिन क्यों मेहनत से लोग सफल हो जाते है इसके बारे में शायद ही कोई बताता है,

अगर आप अभी 20s में हो और आप पढ़ाई कर रहे हो या अपने पहले जॉब में हो तो मेहनत करो, और जब आप 30s तक पहुचोगे तो मेरी तरह शायद आपको भी यही बात समझ में आएगी, की अगर अपने जीवन में कुछ भी पाना है तो ये 2 तरह के केटेगरी में आना होगा तब ही कुछ पा सकेंगे,

शायद गलती हमारी ही है, क्योंकि जब हम फेल होता है अपने 20 और 30 की उम्र तो हम उसे फेलियर मानते है जब की वो सिख होती है, की भाई अगली बार ये गलती नहीं करनी है, लेकिन हम तब क्या करते है हम सीखने के बजाए दूसरों को कॉपी करके उनके रास्ते निकल जाते है, हमारा अपना कुछ होता ही नहीं है वहाँ पर, हम बस देखा – देखी करते है,

हम ये कभी नहीं सोचते है की जिसे हम आज सफल होता देख रहे है जब उसके शुरू किया था तो शायद मुझसे भी ज़्यादा बार वो फेल हुआ होगा, लेकिन हम उसके आज के सक्सेस को अपने फेलियर से कंपेयर करते है, हम इस तरह से कभी नहीं देखते है की हमारा अनुभव कितने दिनों का है और जो आज सफल है उसका अनुभव कितने दिनों का है,

मुझे 17, 18 साल इसलिए मिले क्योंकि मैंने काम करना जल्दी शुरू किया, और मुझे इस बात की ख़ुशी है कि मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया, जो भी किया बार बार फेल हो कर किया, यहाँ तक पहुँचा सिख – सिख कर, इसलिए थोड़ा कॉन्फ़िडेंट भी महसूस करता हूँ आज,

इतने दिनों में मुझे ये समझ में आया की ये 2 तरह के लोग हमेशा सफल होते है –

  1. वो जो प्लान बनाते है और उसे पूरा करते है
  2. वो जो प्लान के सफल होने तक मेहनत करते है

ऐसा क्यों आइए आपको अपने अनुभव के साथ बताने की कोशिस करता हूँ –

वो जो प्लान बनाते है और उसे पूरा करते है

मैंने अपने इतने दिनों के अनुभव में ये पाया की जो लोग सफल होने के लिए प्लान बनाते है और उसे पूरा करते है वो सफल होते है, अब यहाँ तक पहुचना और इस तरह के माइंडसेट से आगे बढ़ने में बहुत समय लगता है क्योंकि ये लोग वो लोग होते है अनुभवी होते है,

ये लोग कई बार फेल होते है और तब जा कर इन्हें ये पता चलता है कि अगर जीवन में कुछ भी पाना है तो वहाँ तक पहुचने के लिए ये रास्ता जाएगा, ये अपनी कैलकुलेशन पहले ही पूरी कर लेते है, ये बेसिकली डॉट्स को मिलाने की कोशिश करते है, वो दूसरो के लाइफ लेशन से सीखते है, उसके बाद अपने अनुभवों को जोड़ते है और उसके बाद आगे का रास्ता निकलते है,

इनके हर एक कदम कैलकुलेटेड होते है, ये अपना अका मूव लेने के लिए थोड़ा समय लेते है, अंत तक सुधरते है,

लेकिन अगर आप अभी अपने 20s और 30s में हो तो आपके पास इतना अनुभव ही नहीं होगा कि आप अपने लिए कैलकुलेटेड रिस्क ले सको,

अच्छी बात पता है क्या है यहाँ तक पहुँचने के लिए आपको कोई अलग से कोर्स नहीं ख़रीदनी होती है, यहाँ तक आप अपने आप पहुँच जाते है जब सालों मेहनत करते है और बार बार फेल होते है, तब आप जान पाते है कि एक्चुअल में आपको आगे क्या करना है,

वो जो प्लान के सफल होने तक मेहनत करते है

आप और हम जब 20 और 30 की उम्र मे होते है तब हम इस केटेगरी में आते है, क्योंकि उस समय हमें बस एक ही बात बताई जाती है कि मेहनत करो, और हम वही करते है, इस समय डिस्ट्रकशन सबसे ज़्यादा होता है, हर दिन लगता है कि काश कोई जड़ाई छड़ी मिल जाती तो जल्दी से सफल हो जाता मैं,

मुझे पता है की आप भी ऐसा ही कुछ ज़रूर सोच रहे होंगे, जब मैं 20 की उम्र में था मैं भी आपकी ही तरह रोज निराश होता था, हर रोज लगता था कि अब और कितना, क्योंकि मेरे ही किश्मत में ऐसा है, लेकिन सच कहूँ यही पर आपको ख़ुद को रोकना होगा, यहाँ आपको बस एक ही बात अपने मन में रखने की जरूरत है,

मुझे आज का काम समय पर पूरा करना है, ये टेक्नीक आपको अंत तक स्थिर रखती है, ना बहुत ज़्यादा आगे आपको देखना है और ना ही पास्ट में आपको देखना है कि मैं कितनी बार फेल हुआ, आपको बस आज का काम ख़त्म करना है,

जैसे जैसे कुछ महीने और साल बीतेंगे आप खुद ही अपने एक्शन को पहचानने लगोगे, की अभी आपको क्या करना है और क्या नहीं करना है, और इस तरह से आप अंत तक टिके रह सकते हो,

मैं अपनी एक छोटी सी स्टोरी बताता हूँ, मेरा पहला जॉब जो शुरू होता था 9 बजे से और ख़त्म होता था करीब करीब 10 बजे, यानी 9 बजे मैं घर से बाहर होता था और 10 से 10.30 रात तक घर आता था, इस समय चाहे कोई भी मौसम हो मेरा यही रूटीन था, रात को जब पैदल घर आता था तो बरसात में जूते फटे होने की वजह से उनमे पानी भर जाता था,

उसे देख कर अंदर से बहुत कुफ़्त होती थी रोना आता था, बहुत रोटा था चलते चलते, फिर कुछ देर बाद हल्का लगता था, जूते से पानी निकलता था देख कर और कभी अच्छा और कभी बुरा लगता था, मैं एक दिन भी नहीं रुका, बस आज का काम करता रहा,

पता है मैंने पाया की ये मेरी आदत में बन गई है अपने हर काम को समय पर ख़त्म करना, मेरे दिमाग़ में उस समय सफल होने की आस नहीं थी मैं बस सरवाइव कर रहा था, आज मैं जहाँ भी हूँ ख़ुश हूँ कि मैं उन रास्तों से गुजरा हूँ, क्योंकि उन्होंने मुझे सिखाया कि मुझे क्या करना चाहिए और क्या नहीं,

Conclusion

आप चाहे किसी भी स्थिति में हो आपको ये तय करना है कि आप इन दोनों में से किस केटेगरी में हो, ये तो तय है कि आप पहले वाले में नहीं हो तो दूसरे वाले में आना ही होगा, क्योंकि कहीं ना कहीं तो आपको रहना ही होगा, सच मानो दूसरा वाला रास्ता सफल होने के लिए सबसे आसान रास्ता है, आपको बस वो करना है अंत तक जो सफल हो जाये,

हो सकता है कि आप मुझसे ज़्यादा टैलेंटेड होगे, क्योंकि मैं नहीं था, मेरे अंदर बस एक आदत थी किसी भी काम को अंत तक करना बिना किसी की कॉपी किए, बस आज के सभी काम को पूरा करना, धीरे धीरे इस आदत ने मुझे सिखाया की अगला कदम मेरा क्या होना चाहिए,

उम्मीद है इस जानकारी से आपके कई साल जरूर बच जाएँगे, कोई प्रश्न हो तो अभी कमेंट में पुछिये, मुझे खुशी होगी उन्हें उत्तर देने में !!

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आज का मैं, 20 साल वाले खुद को ये 7 सलाह देता

Ye post kaam ka laga? Inme se aapki problem kaunsi hai?

Har ebook ek problem ka seedha hal hai. Jo baat aap par fit baithe, use kholiye.

Naveen Pandey

लेखक परिचय: नवीन पांडे 18 वर्षों के लेखन अनुभव और 5000 से अधिक लेखों के साथ, नवीन पांडे एक अनुभवी कंटेंट क्रिएटर और 'माइंड दर्पण' के संस्थापक हैं। संघर्ष से सफलता तक के अपने सफर में उन्होंने डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी चुनौतियों को करीब से महसूस किया है। आज वे अपनी आगामी ई-बुक "Sharp Mind" और ब्लॉग के माध्यम से लोगों को सूक्ष्म आदतों (Micro-Habits) की शक्ति से परिचित करा रहे हैं। उनका मिशन मिडिल क्लास परिवारों के युवाओं को मानसिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें सफलता का एक सरल, व्यावहारिक रोडमैप प्रदान करना है। नवीन का मानना है कि छोटी-छोटी आदतें ही जीवन में बड़ा बदलाव लाती हैं।

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