Study Mistakes Dismiss Negative Opinions : साल 2016 में, मैं 2007 की तरह एक बार फिर खुद को हारा हुआ महसूस कर रहा था। बहुत कुछ आज़माने के बाद ऐसा लग रहा था कि मैं फिर से फेल हो रहा हूँ। मन में बस एक ही सवाल था—’अब इसके बाद क्या?’ कोई सपोर्ट नहीं था। तभी मैंने गौर किया कि एक ऐसी चीज़ है जिसे मैं दिन भर में कई बार इस्तेमाल कर रहा हूँ।
मैंने सोचा क्यों न इसी में हाथ आज़माया जाए, लेकिन मन में एक गहरा डर था कि ‘क्या यह चलेगा?’ क्योंकि इसमें समय लगने वाला था और तब तक सर्वाइव (Survive) करने के लिए मेरे पास कुछ ठोस नहीं था। उस वक़्त कुछ भी पॉजिटिव नहीं दिख रहा था, फिर भी मैंने अपने पुराने बिज़नेस के साथ-साथ कंटेंट क्रिएशन (Content Creation) शुरू कर दिया।
शुरुआती कुछ महीनों में मेरे कई टॉपिक्स बुरी तरह फेल हुए, लेकिन फिर एक टॉपिक काम कर गया और चल निकला। तब से लेकर आज तक, मैं लगातार अलग-अलग माध्यमों से कंटेंट बना रहा हूँ, जिससे लोगों के जीवन में वैल्यू (Value) ऐड हो रही है। अगर उस समय मैंने ‘नेगेटिविटी’ और लोगों की बातों पर ध्यान दिया होता, तो शायद आज आप मुझे यहाँ नहीं पढ़ रहे होते
Study Mistakes Dismiss Negative Opinions
मैंने अक्सर देखा है कि लोग बड़े जोश के साथ लक्ष्य (Goal) बनाते हैं, कुछ हफ़्तों या महीनों तक पूरी ऊर्जा से काम करते हैं, और फिर अचानक उसे छोड़ देते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि कुछ समय बाद वे नकारात्मक चीज़ों (Negative Reviews) पर ज़्यादा ध्यान देने लगते हैं। जब मैंने कंटेंट क्रिएशन की शुरुआत की थी, तब बहुत कम लोग इस फील्ड में थे।
उस समय मेरे मन में भी सवाल उठते थे—’क्या इसमें कोई करियर है?’, ‘यूट्यूब को कितने लोग जानते हैं?’, ‘मेरा कंटेंट कौन देखेगा?’ लेकिन मैंने खुद को एक तर्क (Logic) दिया—अगर मैं अपनी छोटी-से-छोटी समस्या का समाधान यूट्यूब पर ढूंढ रहा हूँ, तो मेरे जैसे लाखों लोग और भी होंगे।
यहीं से मैंने अपने हर नकारात्मक विचार (Negative Thought) को काउंटर करना शुरू किया। मैंने यह कभी नहीं सोचा कि ‘नहीं चला तो क्या होगा?’, मैंने बस यह सोचा कि ‘नहीं चला तो कुछ और ट्राई करूँगा।’ मैं सोचता कम था और एक्शन (Action) ज़्यादा लेता था। हाँ, कई बार ऐसा हुआ जब मैं पूरी तरह डिप्रेशन और डिमोटिवेशन में था। मैंने करीब 70-80 वीडियो सिर्फ प्रैक्टिस के लिए बनाए और कभी अपलोड नहीं किए। उसके बाद दर्जनों वीडियो बनाए जो बिल्कुल नहीं चले। करीब 100 से 150 वीडियो बनाने के बाद, एक वीडियो चल निकला और मैं आज यहाँ हूँ।
अगर आप कोई लक्ष्य बना रहे हैं, तो नकारात्मक पहलुओं को पहले मत सोचिए। बस यह देखिए कि इस लक्ष्य में भविष्य है या नहीं? अगर है, तो बस एक्शन लीजिए। आप 99 बार फेल हो सकते हैं, लेकिन जिस दिन एक बार सफल हो गए, आप हमेशा के लिए सक्सेसफुल बन जाएंगे।,
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Constructive vs. Destructive Critics
हमारे आसपास ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो मुफ़्त में ज्ञान बाँटने के लिए तैयार बैठे हैं। आप कुछ भी नया शुरू करेंगे, वे उसमें हज़ार कमियाँ और नकारात्मक (Negative) बातें गिना देंगे। लेकिन याद रखिये—अगर सामने वाला किसी काम में फेल हुआ है, तो इसका मतलब यह कतई नहीं कि आप भी फेल हो जाएंगे। हो सकता है वह सिर्फ किताबी बातें कर रहा हो और उसने खुद कभी कोई एक्शन (Action) लिया ही न हो।
मैंने भी जब शुरुआत की थी, तो अपने प्लांस किसी के साथ शेयर नहीं किए। मेरा पूरा ध्यान अपनी जानकारी के हिसाब से काम को बेहतर बनाने पर था। आपके आसपास ऐसे कई लोग होंगे जो आपका मनोबल गिराने की कोशिश करेंगे—हो सकता है इनमें आपके करीबी भी शामिल हों। लेकिन यह सब सिर्फ एक ‘शोर’ है,
उससे ज़्यादा कुछ नहीं। इसलिए, अगर आपने कोई लक्ष्य बनाया है, तो नेगेटिव रिव्यूज को आने दीजिए। उन रिव्यूज को एक ‘डेटा’ की तरह इस्तेमाल करें और यह देखें कि कौन से तरीके काम नहीं करते। फिर उसी समझ के साथ अपने अगले एक्शन की प्लानिंग करें
Treat Mistakes as Data Points
कंटेंट क्रिएशन की शुरुआत में मैंने 100 से 150 वीडियो बनाए, जो बिल्कुल नहीं चले। करीब 3 महीने तक मैं रोज़ वीडियो डालता और बस व्यूज़ (Views) चेक करता था, जो कभी आते ही नहीं थे। मैं हर रोज़ खुद को मोटिवेट करता और अगले दिन फिर से मैदान में उतरता। वैसे किसी भी टॉपिक को समझने के लिए कम से कम 100 प्रयास तो ज़रूरी हैं, लेकिन मेरी गलती यह थी कि मैंने उस समय के ट्रेंड (Trend) को समझने के बजाय सिर्फ वीडियो बनाने पर ध्यान दिया।
भले ही वे वीडियो फेल हो गए, लेकिन उन्होंने मुझे एक बहुत बड़ा सबक दिया—मैंने यह जान लिया कि यूट्यूब पर किस तरह के वीडियो नहीं चलते हैं। आज उसी असफलता के दम पर मैं दावे के साथ एक ऐसी रणनीति (Strategy) बता सकता हूँ, जो कंटेंट क्रिएशन में वाकई काम करती है। याद रखिये, ‘क्या करना है’ से ज़्यादा ज़रूरी यह जानना है कि ‘क्या नहीं करना है’।
The Edison Mindset
महान वैज्ञानिक थॉमस एडिसन से जब एक पत्रकार ने पूछा कि ‘आप 10,000 बार फेल हुए, क्या आप इससे डिमोटिवेट नहीं होते?’, तो उन्होंने कमाल का जवाब दिया। उन्होंने कहा—’बिल्कुल नहीं! ये मेरी असफलताएं नहीं, बल्कि मेरे एक्शन स्टेप्स (Action Steps) थे। अब मुझे यह पक्का पता है कि बल्ब बनाने के लिए ये 10,000 तरीके काम नहीं करते।’ यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप कोई किताब पढ़ रहे हों। जब तक आप पूरी किताब खत्म नहीं कर लेते, आप लेखक के असली मकसद (Motive) को नहीं समझ पाएंगे। इसके लिए आपको हर पन्ना पढ़ना ही होगा।
जब आप कोई लक्ष्य (Goal) बनाते हैं और उसमें बार-बार फेल होते हैं, तो दुखी होने के बजाय यह सोचिए कि अब आपको उन रास्तों का पता चल गया है जो काम नहीं करते। आज के दौर में तो आपको खुद हर बार ठोकर खाने की ज़रूरत भी नहीं है; एक क्लिक पर आप यह जान सकते हैं कि आपके लक्ष्य के लिए कौन-कौन से तरीके पहले ही फेल हो चुके हैं। अब बस डिमोटिवेट होने के बजाय, उस ‘अगले तरीके’ की तलाश करें जिससे आपका काम बन जाए।
Emotional Detachment from Work
“जब भी हम कोई छोटा सा एक्शन (Action) लेते हैं, तो तुरंत उससे बड़े नतीजे (Expectations) की उम्मीद पाल लेते हैं। हम अपने काम से इतना ज़्यादा जुड़ (Attach) जाते हैं कि नतीजा न मिलने पर टूट जाते हैं। श्रीमद्भगवद्गीता में श्री कृष्ण कहते हैं—‘कर्म कर, फल की चिंता मत कर।’ मुझे लगता है कि उन्होंने यह बात काम के प्रति इसी जुड़ाव (Attachment) को खत्म करने के लिए कही होगी।
अगर हम अपने लक्ष्य के लिए लिए गए एक्शन से खुद को अलग (Detach) कर लें, तो हम पहले से कहीं ज़्यादा बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। अपनी शुरुआत में मैंने 80 से ज़्यादा वीडियो बनाए, जिसमें मेरी 2 महीने की कड़ी मेहनत लगी थी। उस समय कोई आर्थिक मदद न मिलने की वजह से मैं अक्सर डिमोटीवेट (Demotivate) भी होता था।
लेकिन फिर मैंने सोचा कि शायद मैं अभी कैमरे के सामने उतना काबिल (Skilled) नहीं हूँ। मैंने उन वीडियो को एक ‘प्रैक्टिस’ की तरह लिया और खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया। नतीजा यह हुआ कि परफेक्शन के बोझ के बिना मैं बेहतर सीख पाया।,
Trial and Error is the Best Teacher
आज मैं जिस मुकाम पर हूँ, वह इसी एक तरीके (Method) की वजह से है। जिनके जीवन में कोई सही मार्गदर्शक या मेंटर (Mentor) नहीं होता, वे अक्सर बीच मझधार में गोते लगाते रह जाते हैं और उनके हाथ कुछ नहीं आता, क्योंकि उन्हें सही दिशा का पता नहीं होता। साल 2007 से मैंने भी सिर्फ ‘ट्रायल एंड एरर’ (Trial and Error) यानी ‘करके सीखने’ के दम पर काम किया।
अपना पहला बिजनेस बार-बार कोशिश करके शुरू किया, फिर दूसरा और उसके बाद कंटेंट क्रिएशन। आज करीब 200 से ज़्यादा वीडियोज़ के अनुभव और लगातार सीखने के बाद मैं यहाँ हूँ, जहाँ आप मुझे पढ़ रहे हैं।
इसमें कोई रॉकेट साइंस नहीं है और ऐसा भी नहीं है कि यह सिर्फ मैंने किया है। हम सभी इसी तरह गिरकर संभलते हुए आगे बढ़ते हैं। अगर आप अपने हर एक्शन (Action) से सीखते हुए कंसिस्टेंट (Consistent) रहें, तो सफलता मिलना तय है।
मेरी सलाह है कि जो भी आपका लक्ष्य है, उसे पाने के लिए किसी ‘मेंटर’ का साथ लें, यह आपकी यात्रा को आसान बना देगा। और अगर आप मेंटर नहीं चुन सकते, तो बस काम शुरू कर दीजिए—फेल होइए, सीखिए और फिर से एक्शन लीजिए। एक समय के बाद आप जीत ही जाएंगे।”
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Conclusion : मेरी राय में
अगर आप कोई लक्ष्य (Goal) बना रहे हैं और नकारात्मकता (Negativity) को देखकर आपको लगता है कि ‘मैं भी फेल हो जाऊँगा’, तो यकीन मानिए आप उसी पल हार चुके हैं। कोई भी लक्ष्य सिर्फ एक एक्शन से पूरा नहीं होता; उस पर लगातार काम करना पड़ता है। ज़रा एक किसान के बारे में सोचिए, जो कड़ी धूप में पसीना बहाकर बीज बोता है और उसकी देखभाल करता है। क्या वह हमेशा पहली बार में ही सफल हो जाता है? नहीं, वह बार-बार मेहनत करता है। एक कलाकार भी अपनी कला को निखारने के लिए हज़ारों बार कोशिश करता है।
यहाँ तक कि आपने भी चलना एक बार में नहीं सीखा था। आप बचपन में बार-बार गिरे, संभले और फिर खड़े हुए, तभी आज आप अपने पैरों पर चल पा रहे हैं। इसलिए, लक्ष्य की राह में चाहे दुनिया की बातें हों या आपके काम का खराब नतीजा—नकारात्मकता को ऐसे देखें कि ‘अच्छा, यह तरीका काम नहीं किया, अब अगला एक्शन लेते हैं।’ बस बिना रुके कंसिस्टेंट (Consistent) बने रहें, सफलता आपको ज़रूर मिलेगी।
उम्मीद है यह जानकारी आपके काम आएगी। यदि आपका कोई भी प्रश्न है, तो अभी कमेंट में पूछें। अपना कीमती समय देने के लिए हृदय से धन्यवाद। आपका दिन हमेशा शुभ और सफल रहे !!
Ye post kaam ka laga? Inme se aapki problem kaunsi hai?
Har ebook ek problem ka seedha hal hai. Jo baat aap par fit baithe, use kholiye.









