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Breakdown Complex thinking : इस वजह से 99% लोग बस Follow करते है दूसरो को और Fail हो जाते है!

Published On: April 11, 2026
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Breakdown Complex thinking

Breakdown Complex thinking : क्या आपको भी अपने Decision पर कई बार शक होता है कि क्या मैंने यह फ़ैसला सही लिया है या नहीं? क्या आपके छोटे-छोटे फैसले भी आपके लिए कोई और लेता है? क्या आपको हमेशा यह लगता है कि मैं जो कर रहा हूँ शायद गलत है? अगर ऐसा है, तो अभी रुकिए और थोड़ा सोचिए कि क्या इसे ठीक करने की ज़रूरत है?

बचपन में हमेशा हमारे हर फैसले हमारे Parents लेते थे और यह सही भी है। लेकिन अगर आप अब 21 या उससे ऊपर के हैं और अभी भी आपके फैसले (जो बहुत बड़े नहीं हैं) आपके Parents ले रहे हैं, तो यह भी ठीक है; लेकिन क्या ये फ़ैसले सही हैं या नहीं, इस पर आप गहराई से नहीं देख रहे हैं तो परेशानी बढ़ सकती है।

क्योंकि हम इंसान कोई भी फैसला अपने Past Experience और Present की Situation को देखते हुए लेते हैं। जिसकी जानकारी जितनी सटीक होती है, या जो भी अपने अनुभव को बारीकी से देख पाता है, उसके फ़ैसले हमेशा सटीक होते हैं। इसके बाद एक सही फैसला लेने वाला इंसान, एक Complex Situation को छोटे-छोटे हिस्सों में तोड़ता है और अपने अनुकूल फ़ैसला लेता है।

सबसे पहले तो यह समझना होगा कि हम अपने फ़ैसले क्यों नहीं ले पाते हैं। अगर किसी ने पहले कभी कोई फैसला नहीं लिया है, तो वह आगे भी कोई फ़ैसला नहीं ले सकता। फैसला वे लेते हैं जो Action लेते हैं, क्योंकि फैसले लेते ही आपको उसके अनुकूल Action भी लेना पड़ता है। ऐसा नहीं है कि आपने बस अपने मन में एक प्लान बनाया और आपका काम हो गया।

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जो भी अपने लिए कुछ Create करना चाहते हैं या पहले कभी Create किया है, वे फ़ैसले लेने में सक्षम होते हैं। आसान शब्दों में कहूँ तो जो कर्मठ है, जो कुछ सुधारना या बनाना चाहता है, वह फ़ैसले आसानी से ले सकता है।

सोचिए कि आपको एक जगह से दूसरी जगह जाना है, तो उसके लिए बस मन में सोच लेने भर से आप वहाँ नहीं पहुँच जाएँगे। आपको अपने लिए एक Plan भी बनाना होगा और उसके लिए Action भी लेने होंगे। आप ज़रा गौर करिएगा, बस कुछ ही लोगों को Action लेने के बारे में पता नहीं होता है; यह तब होता है जब हम बच्चे होते हैं।

उसके बाद अगर कोई Action नहीं ले रहा है, तो उसमें ज़्यादातर लोग या तो Decision लेने के आदी नहीं होते, या वे लोग Decision लेना ही नहीं चाहते क्योंकि फिर Action लेना होगा। ऐसी स्थिति में ‘कौन फ़ैसला लेने जाए’, ऐसा उन्हें लगता है। उन्हें बस जीवन में आराम चाहिए होता है; वे कभी भी कुछ भी Critical नहीं करना चाहते।

अब अगर आप Decision इसलिए नहीं लेना चाहते क्योंकि आपको उसके बाद मेहनत करनी होगी और आप इससे बचना चाहते हैं, तो इस स्थिति में आप खुद ही समझदार हैं। लेकिन अगर आपको नहीं पता है कि फैसले कैसे लिए जाते हैं, तो आइए कुछ Situation समझते हैं; क्योंकि जैसे ही आप किसी चीज़ को गहराई से देखना शुरू कर देते हैं, आप आसानी से उसे पूरा भी कर लेते हैं।

अब जैसे मान लेते हैं कि मैं एक Author हूँ और मुझे एक Book लिखनी है। तो सबसे पहले मैं ऐसी Problem को देखूँगा जो वाकई सबकी ज़रूरत है, लेकिन जहाँ Real Knowledge की कमी है। इसके लिए मुझे Research करनी होगी—कुछ ऑनलाइन, कुछ Expert से और कुछ अपने आसपास के Situation को देखते हुए।

अब अगर Topic मिल गया, तो एक अच्छा-सा Book Title Decide करने के बाद अब हम अपने Action की तरफ़ बढ़ सकते हैं। यहाँ सबसे पहले जो भी टॉपिक है, मुझे उसे एक-एक करके Point out करना होगा कि जो जानकारी मैं यहाँ देने वाला हूँ, वह कैसे काम करती है, इसे क्यों लिखना ज़रूरी है और इसके Result क्या होंगे।

यानी अगर मैं किसी Topic की गहराई (In-depth) में जाने वाला हूँ, तो हर एक Chapter को कई छोटे-छोटे Topics में पहले तोड़कर और उसका Rough करने के बाद, उसे Book में Details के साथ रखता हूँ। फिर कहीं जाकर एक Reader उससे खुद को Relate कर पाता है।

अगर मैं बस एक Topic उठाऊँ और बस ऊपर-ऊपर से वह कैसे काम करता है लिखूँ, तो Reader को क्या, मुझे भी वह पसंद नहीं आएगी कि मैं उस पर उतना समय बिताऊँ। कोई भी Reader बुक इसलिए पढ़ता है कि वह बुक उसके AIM में Value ऐड कर रही है या नहीं।

जो भी आपके जीवन के फ़ैसले हैं, उन्हें अगर आप बस एक Topic समझते हुए करेंगे तो यह कभी नहीं हो पाएगा। मान लीजिए आपको सुबह उठना है; आपने अब फ़ैसला लिया कि कल से सुबह उठेंगे। अब क्या लगता है, बस Motivation से आप यह कर पाएँगे? नहीं, आप बस कुछ ही दिन ऐसा कर सकते हैं।

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लेकिन अगर आप इसे Breakdown करते हैं, जैसे अगर आपको सुबह उठना है तो:

  • आपको रात को जल्दी सोना होगा ताकि आपकी नींद पूरी हो जाए और आप सुबह जल्दी उठ पाएँ।
  • रात का खाना कम (Light) रखना होगा ताकि आप जल्दी सो जाएँ और आपकी नींद जल्दी खुल जाए।
  • सोने से पहले Smartphone को Avoid करना होगा ताकि आप गहरी नींद ले सकें और जल्दी जग पाएँ।
  • आपके अंदर एक AIM भी होना चाहिए कि अगर आप सुबह उठते हैं, तो यह सब क्या पाने के लिए कर रहे हैं—चाहे वह Fitness हो या Wealth।
  • आपको यह भी जानना होगा कि आप ऐसा क्या कर रहे हैं जिसकी वजह से आपको सुबह जल्दी उठने में परेशानी होती है।

यानी आपको एक-एक Point को Breakdown करना होगा, उसके बाद एक फ़ैसला लेना होगा कि अब क्या सुधारा जाए ताकि जल्दी उठने में परेशानी न हो।

इसी तरह से आपको बस अपने Situation को समझते हुए, उसे छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटना होगा और उसके बाद Decision लेना होगा। तब मुमकिन है कि आप सही तरीके से सही Decision ले सकेंगे और गलती होने की गुंजाइश कम-से-कम हो जाएगी।

Conclusion : मेरी राय में

आपके हैबिट आपके फ़ैसले को Shape देते हैं, और आपके फैसले आपके जीवन को Shape देते हैं। अब यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप कैसे चल रहे हैं। यह बहुत मुश्किल नहीं है; आपको बस यह देखना है कि आपको जीवन में क्या चाहिए और क्यों चाहिए। उसके हिसाब से आपको हैबिट अपनानी होगी और आप अपने फ़ैसले आसानी से ले सकेंगे।

अगर आप बस Flow में जीवन जी रहे हैं, तो आप अपने जीवन से यह उम्मीद नहीं कर सकते कि जो आपको चाहिए वह आपको मिल भी जाए। इसके लिए आपको अपने Action plan बनाने होंगे।

उम्मीद है दी गई जानकारी आपके जीवन को भी Shape देगी। कोई प्रश्न है तो अभी comment में पूछें। आपके कीमती समय के लिए दिल से धन्यवाद। आपका दिन हमेशा शुभ रहे।

Ye post kaam ka laga? Inme se aapki problem kaunsi hai?

Har ebook ek problem ka seedha hal hai. Jo baat aap par fit baithe, use kholiye.

Naveen Pandey

लेखक परिचय: नवीन पांडे 18 वर्षों के लेखन अनुभव और 5000 से अधिक लेखों के साथ, नवीन पांडे एक अनुभवी कंटेंट क्रिएटर और 'माइंड दर्पण' के संस्थापक हैं। संघर्ष से सफलता तक के अपने सफर में उन्होंने डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी चुनौतियों को करीब से महसूस किया है। आज वे अपनी आगामी ई-बुक "Sharp Mind" और ब्लॉग के माध्यम से लोगों को सूक्ष्म आदतों (Micro-Habits) की शक्ति से परिचित करा रहे हैं। उनका मिशन मिडिल क्लास परिवारों के युवाओं को मानसिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें सफलता का एक सरल, व्यावहारिक रोडमैप प्रदान करना है। नवीन का मानना है कि छोटी-छोटी आदतें ही जीवन में बड़ा बदलाव लाती हैं।

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