कुछ साल पहले तक मुझे ये लगता था जो अपने जीवन में कुछ भी पाते है वो उनकी क़िश्मत होती है, अपने बचपन से अभी तक मैं यही समझा था, लेकिन अभी कुछ सालों में ये समझ में आने लगा है कि इस बात में पूरी तरह से सच्चाई नहीं है, हाँ किशमत भी एक फैक्टर हो सकता है लेकिन ये पूरी तरह से नहीं है,
क्योंकि ऐसे कई लोग है जो कई बार अपने जीवन में फेल हुए थे लेकिन आज वो सफल है, ये बस उनकी जिद्द और मेहनत का कमाल है, हाँ वो सकता है की आप कहे की ये किशमत थी, लेकिन मुझे इस बात पर अब भरोसा नहीं होगा, पूरी तरह से तो कभी नहीं, क्योंकि अब मैं समझने लगा हूँ सब कुछ फोकस का कमाल है,
आपका यही फोकस आपको ये समझने में मदद करता है की आपके लिए क्या जरूरी है और इसे कैसे किया जाना चाहिए, जो आज किसी भी स्कूल में नहीं सिखाई जाती, ये आपको अपने सिचुएशन के हिसाब से समझना होगा है, आप जितना ज़्यादा फोकस कर पाये आप उतना दूर तक सोच सकते है, और जो आप सोच सकते है आप कैपेबल है उसे करने के लिए, तरीका अलग बेशक हो सकता है,
आपका फोकस ख़त्म नहीं हो रहा है
अगर मैं आपसे अभी ये कहूँ की आपका फोकस ख़त्म नहीं हो रहा है बस इसकी दिशा ग़लत है तो हो सकता है आप इससे इनकार कर दे, आप में से कई लोग ये भी बोल सकते है की फोकस इतना कब से जरूरी होने लगा, सच कहूँ तो ये शुरू से ही जरूरी था, आपके अंदर ही है ये हमेशा से,
सोचिए की आपका वो पसंदीदा काम जिसे करते समय आपको समय का पता ही नहीं चलता है क्या ये फोकस नहीं है, क्या जब आपको भूख लगती है और जब खाना सामने आती है तो किसी को बताना पड़ता है की ये आपके लिए बहुत जरूरी है, जैसे ही खाना सामने आता है आप आपको कुछ और नहीं सूझता,
जी हाँ, क्योंकि आपके दिमाग़ और शरीर को ये पता है की ये कितना जरूरी है, आप सब कुछ भूल जाते है उस समय,
अगर आप कोई काम कर रहे है और आपका मन वहाँ नहीं लग रहा है जैसे की पढ़ाई हो या कोई भी काम, अगर फिजिकली कोई परेशानी नहीं है तो फोकस टूटने का सवाल ही पैदा नहीं होता, बस आपकी दिशा ही ग़लत है यहाँ पर,
अगर आप अपने मन को अपने दिमाग़ को उस सही वजह से उस काम को जोड़ पाओ, अगर आप अपने दिमाग़ को ये दिखा पाओ की ये काम आपके लिए क्यों जरूरी है तो इसकी संभावना बहुत ज़्यादा बढ़ जाती है की आप उस काम को पूरा करोगे,
उदाहरण – मान लो आप पढ़ाई कर रहे हो और आपका मन नहीं लग रहा है, आप ये दिखा पाओ की अगर आप आज पढ़ लेते हो तो कल आप अपने जीवन में वो सब कुछ पा सकते हो जिसकी जरूरत होगी या जिसके लिए आप आप सपने देख रहे हो,
अगर आप काम कर रहे हो और ये मन को दिखा पाये की अगर आप आज काम नहीं करोगे तो आप अपने बिल पे नहीं कर पाओगे, घर में राशन नहीं ले जा पाओगे, परिवार के चेहरे पर वो ख़ुशी नहीं देख पाओगे, तो अब आपका दिमाग़ पूरी तरह से अलर्ट एनएच जाएगा,
क्योंकि हमारा दिमाग़ इसी तरह से काम करता है, ये आदि काल से ही सर्वाइवर वाली हालात में बहुत ज़्यादा ऐक्टिव हो जाता है, और तब तक वो अपनी एनर्जी पूरी तरह से बचा कर रखता है,
आपका विजन जितना ज़्यादा क्लियर होता जाएगा आप उतने ही ज़्यादा अपने काम में फोकस देखोगे !!
मैंने फोकस पाने के लिए 100 से ज़्यादा किताबें पढ़ डाली
मुझे कुछ साल पहले तक लगता था जो अपने लिए में कुछ भी अचीव कर पाते है उनके पास कोई ट्रिक होती होगी, वो सकता है उन्हें ऐसा कुछ पता है जो शायद मुझे नहीं पता है, तभी तो मेरा ज्यादातर काम मैं जैसे तैसे पूरा करता हूँ या कई बार छोड़ देता हूँ इस वजह से बस मन नहीं लग रहा है या मुझे पसंद नहीं,
मेरा माइंडसेट कुछ ऐसा था कि मेरा ज्यादातर मन काम को करने में नहीं लगता था बस उसे कैसे भी पूरा करने के बारे में सोचता था, लेकिन तब मुझे रियलाइज हुआ की लोगो के पास कोई ट्रिक होगी तभी तो वो सफल हो रहे है,
मैंने इस वजह से कई सारे बुक्स को पढ़ा, जैसे की Deep Work, Hyperfocus, Master your thinking, 1% Rule ऐसे कई सारे बुक्स, इन सभी बुक्स फोकस के बारे में अपनी अपनी तरह से बताती है, कई तो बहुत पेचीदा था, कई हैबिट पर फोकस कर रहे है कई तो ये बता रहे है की आपका फोकस कितन जरूरी है, मुझे लगभग सभी बुक्स बहुत ज़्यादा अच्छी लगी,
लेकिन अब कुछ सालों में मैं इन सभी बुक्स के सार के बारे में समझ पा रहा हूँ,
मैंने इसे बहुत सीधे शब्दों में ये सीखा की अगर आप अपनी जरूरत को या ड्रीम्स को जोड़ पाये अपने किसी काम से तो वहाँ आप 100% फोकस में रहोगे, ये जितनी बारीकी से होगा उतना ही ज़्यादा देर तक आप फोकस कर पाओगे, अब ये आपके ऊपर है की आप इसे कैसे करते हो,
इसे करने के लिए आप ये कुछ तरीके अपना सकते हो जिससे आप अपने फीलिंग को काम से जोड़ सकते हो –
- अपनी जरूरत को अपने काम से जोड़ो
- अपने हैबिट के माध्यम से काम को जोड़ो, रोज़ वो काम करो जो आपको लगता है इससे रिजल्ट मिलेगा आपके जीवन में,
- रोज़ लिस्ट बना लो की आपको अपने जीवन में कहाँ कहाँ ध्यान देना है
यानी लिखना शुरू करो, अपने दिमाग़ को बताना शुरू करो की आपको वाक़ई क्या चाहिए, इससे आपका विज़न क्लियर होता जाएगा और जब कुछ करोगे तो वहाँ कन्फ़्यूज़न नहीं होगा,
Conclusion
आप जहाँ भी अभी है आपके अंदर फोकस है, किसी के पास कम है और किसी के पास ज़्यादा है, जिसके पास कम है प्रैक्टिस से ये बढ़ सकता है, बस आपको ख़ुद को दिखाना होगा की आपके लिए वाकई क्या जरूरी है, बस इतना बहुत कुछ नहीं करना आपको,
रोज़ कुछ भी करने जाओ, पढ़ाई हो या कोई भी जरूरी काम बस दिमाग़ को बताओ की वो आपके लिए क्यों जरूरी है, ये बहुत स्ट्रॉंग होना चाहिए- साथ में ये भी बताओ की आपको क्या नहीं करना चाहिए और उससे क्या होगा,
मैं इस टेक्नीक को बहुत सालों से आजमा रहा हूँ जिसमे मुझे हमेशा रिजल्ट दिए है, उम्मीद है इससे आपको दिशा मिलेगी, कोई प्रश्न हो तो अभी कमेंट में पूछें, मुझे ख़ुशी होगी उनके उत्तर देने में !!
Ye post kaam ka laga? Inme se aapki problem kaunsi hai?
Har ebook ek problem ka seedha hal hai. Jo baat aap par fit baithe, use kholiye.









